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फ्रांस में रूसी ‘वुडेन हाउस’ कहाँ से आया?

niceartphoto/Alamy/Legion Media
ज़रा सोचिए: फ्रेंच रिवेरा के एक शानदार पार्क के बीचोंबीच खड़ा है… एक रूसी ‘वुडेन हाउस’, वो भी बिल्कुल असली। पर यह आया कहाँ से?

1869 में, पावेल वॉन दर्विज़ (एक वास्तविक राज्य पार्षद, रेलवे ठेकेदार और निर्माता) ने नीस में 10 हेक्टेयर ज़मीन खरीदी। उन्होंने वहाँ "वैल्रोज़" एस्टेट बनवाया – जिसमें एक नियो-गॉथिक स्टाइल का महल और एक खूबसूरत पार्क था। उनके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, वो इतने सफल थे, कि लोग उन्हें "रूसी मोंटे क्रिस्टो" भी कहते थे।

इस पार्क में पूरा दिन बिताया जा सकता था:

फ्रेंच गार्डन के बाद अंग्रेज़ी लैंडस्केप गार्डन था, पाम ट्री का जंगल, ब्राज़ीलियाई एगेव (एक प्रकार का पौधा), बहते झरने, रास्तों पर गज़ेबो और मूर्तियाँ थीं।

और इसी बीच एक रूसी वुडेन हाउस।

मालिक ने इसे जहाज़ से अपनी रूसी संपत्ति से यहाँ मँगवाया था।

यह वुडेन हाउस उन्हें मातृभूमि की याद दिलाता था , और शैक्षिक  मकसद भी रखता था ।

इसके नक्काशीदार मुखौटे पर कहावतें लिखी थीं – जैसे:

"ऐसा भी साल आता है जब एक दिन में सात मौसम होते हैं"

और

"बीयर और शहद कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन असली चीज़ है – प्यार की कीमत।"

आज वैल्रोज़ विला में यूनिवर्सिटी ऑफ़ नीस सोफिया एंटीपोलिस का प्राकृतिक विज्ञान संकाय (फैकल्टी ऑफ नेचुरल साइंसेज) है।