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कॉकेशियन लोगों की लंबी उम्र के पीछे 5 मुख्य कारण

अब्दुल्ला गाल्बात्सोव, गाँव खोय के इमाम, गाँव के मुखिया, चेचन गणराज्य
Ekaterina Chesnokova / Sputnik
प्रकृति ने होमो सेपियन्स को 120 से 150 साल तक जीने की क्षमता दी है। लेकिन क्या कोई इस उम्र के करीब पहुँच पाया है? और अगर हाँ, तो कैसे?

ज्यादातर लोग इस उम्र का आधा भी क्यों नहीं जी पाते – और इसके पीछे की वजहें अक्सर हम खुद ही बनाते हैं: खराब पर्यावरण, खराब खान-पान, तनाव, शराब और धूम्रपान। दूसरी तरफ, कॉकेशस में बहुत लंबी उम्र जीने का राज़ सदियों से वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा है। जेरोन्टोलॉजिस्ट इसके लिए एक खास शब्द भी इस्तेमाल करते हैं – 'ब्लू ज़ोन' – यानी ऐसे क्षेत्र जहाँ शतायु (100 साल से ज़्यादा उम्र) लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा होती है। आखिर इन इलाकों के लोग 90 की उम्र में भी इतने फुर्तीले और तरोताज़ा कैसे रहते हैं? रिसर्च और विशेषज्ञों की राय में पाँच मुख्य कारण हैं, जो एक-दूसरे से जुड़े हैं। हालाँकि कॉकेशस की जीवनशैली को किसी बड़े शहर में पूरी तरह से अपनाना मुश्किल है, लेकिन इन पाँचों चीज़ों पर गौर करना ज़रूरी है।

1. जेनेटिक फैक्टर

कबार्दिनो-बाल्केरियन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बुढ़ापे और लंबी उम्र से जुड़े दस प्रमुख ‘जीनों’ की पहचान की है। 'APOE' जीन, जो कोलेस्ट्रॉल मेटाबोलिज्म और अल्जाइमर रोग के जोखिम के लिए जिम्मेदार है, ने खास ध्यान आकर्षित किया है। इसका "अनुकूल" रूप, 'e3 allele', 90 साल तक जीने वाले लोगों में काफी अधिक पाया गया। इसके अलावा, शतायु (सेंटेनरियन) लोगों में हृदय रोगों, ऑक्सीडेटिव तनाव और डीएनए रिपेयर (ACE, AGT, PON1, PON2, CAT, BRCA1 और अन्य) से जुड़े जीनों में म्यूटेंट एलील की संभावना कम थी।

द्ज़ुआरीकाऊ गाँव के 80-वर्षीय निवासी, द्ज़ोत्सा त्सोपानोव (सेंटर में), स्कूली बच्चों के साथ बातचीत करते हुए
Yakov Berliner / Sputnik

2. पहाड़ों की हवा

ऊँचाई पर रहना, जहाँ ऑक्सीजन का स्तर कम होता है, कोई मुश्किल नहीं बल्कि शरीर के लिए एक कसरत है। हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) पर शरीर ज़्यादा लाल रक्त कोशिकाएँ बनाता है और नई रक्त वाहिकाएँ विकसित करता है — जो लंबे समय में जवानी को बरकरार रखने में मदद करता है। साथ ही, यहाँ की हवा साफ और औद्योगिक प्रदूषण से मुक्त है। कॉकेशस के कई गाँवों के लिए यही उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी है, और यही उनकी सेहत का एक बड़ा राज़ है।

दागेस्तान। कज़बेकोव्स्की जिले में सलाताऊ पर्वत श्रृंखला का दृश्य
Musa Salgereev / TASS

3. पारंपरिक खान-पान

कॉकेशस के शतायु (सेंटेनरियन) लोगों का आहार आम और प्राकृतिक चीज़ों पर आधारित है। उदाहरण के लिए, फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट्स (दूध, मात्सोनी, चीज़) रोज़ाना की मुख्य चीज़ें हैं। जो पेट और आँतों को स्वस्थ रखती हैं और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाती हैं। फलियाँ, हरी सब्जियाँ और खरबूज़े — ये सब भी खूब खाए जाते हैं। यहाँ तक कि लाल मिर्च का 'अदजिका' सॉस भी फायदेमंद माना जाता है — यह ब्लड प्रेशर और खून के बहाव को दुरुस्त रखती है।

ग्रोज़नी, मेज़ पर बैठे बुज़ुर्ग
Said Tsarnaev / Sputnik

4. शारीरिक गतिविधि

कॉकेशस के ज़्यादातर बुज़ुर्ग ज़िंदगी भर शारीरिक काम करते हैं — अक्सर पहाड़ों में, खुली हवा में। यह कोई ज़बरदस्त कसरत नहीं, बल्कि रोज़ की मेहनत है: बाग़बानी, पशुओं की देखभाल, पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना। इससे उनकी मांसपेशियाँ मज़बूत रहती हैं और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम भी बेहतर काम करता है।

दागेस्तान गणराज्य, गुनिब्स्की ज़िले के सोग्रात्ल गाँव की एक निवासी
Said Tsarnaev / Sputnik

5. परिवार का सहारा और तनावमुक्त जीवन

कॉकेशस में बुज़ुर्ग अकेले नहीं रहते — उनके आस-पास परिवार होता है, जो उन्हें प्यार और सम्मान देता है। इससे तनाव कम होता है। अब्खाज़िया के शतायु लोगों की दिनचर्या बहुत नियमित होती है — खाना, काम, आराम, सब एक तय वक्त पर। इसलिए उनकी नसों पर दबाव नहीं पड़ता। शहरों की भागदौड़ और होड़ के बजाय, वहाँ शांति और सरल जीवन का आनंद लिया जाता है।

दागेस्तान गणराज्य। दरबंत के निवासी
Vladimir Vyatkin / Sputnik
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