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नोवगोरोद क्रेमलिन के बारे में 5 दिलचस्प तथ्य

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क्या आप जानते हैं कि इसे ‘डेटिनेट्स’ क्यों कहा जाता था?

1. रूस के सबसे प्राचीन किलों में से एक

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वेलिकी नोवगोरोद का क्रेमलिन रूस के सबसे पुराने किलों में गिना जाता है और यह यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है।

2. इतिहास की गहराई

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पहला किला 11वीं सदी में बनाया गया था, लेकिन उस समय की न तो दीवारें बची हैं और न ही टावर। आज जो पत्थर की मजबूत दीवारें हम देखते हैं, वे 15वीं सदी में बनाई गई थीं — जब नोवगोरोद को मॉस्को में मिला लिया गया था। यह निर्माण महान राजकुमार इवान तृतीय के आदेश पर हुआ था।

3. इटालियन आर्किटेक्ट्स का कमाल

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दिलचस्प बात यह है कि मॉस्को और नोवगोरोद के क्रेमलिन लगभग एक ही समय में बने और दोनों के निर्माण में इटालियन वास्तुकारों ने योगदान दिया। इतिहासकार मानते हैं कि प्रसिद्ध वास्तुकार अरिस्टोटल फियोरावंती (जिन्होंने मॉस्को क्रेमलिन का उस्पेंस्की कैथेड्रल बनाया) ने भी नोवगोरोद क्रेमलिन के डिजाइन में भूमिका निभाई थी।

4. दूसरे किलों के लिए बना मिसाल

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नोवगोरोद क्रेमलिन बाद में रूस के अन्य किलों के लिए एक मॉडल बना। उदाहरण के तौर पर तुला और निज़नी नोवगोरोद के क्रेमलिन, जो इवान तृतीय के समय में ही बनाए गए।

5. यहाँ इसे ‘डेटिनेत्स’ क्यों कहते हैं?

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वेलिकी नोवगोरोद में क्रेमलिन को “डेटिनेत्स” कहा जाता है।
इस नाम को लेकर दो मशहूर कहानियाँ हैं:
- एक मान्यता के अनुसार, किले के अंदर राजकुमार की युवा सेना रहती थी — जिन्हें “किले के बच्चे” और उसके रक्षक कहा जाता था।
- दूसरी कहानी कहती है कि किले की दीवारों के अंदर सचमुच नोवगोरोद के रईसों (बोयार) के बच्चे रहते थे।