बर्फ ही तो है लेक बैकाल घूमने की बड़ी वजह!
यह फरवरी के अंत में पूरी तरह जमती है और मार्च के अंत में पिघलना शुरू होती है। बर्फ की मोटाई हर जगह अलग-अलग होती है, आधे मीटर से लेकर कई मीटर तक।
सबसे मनोरम बर्फ ओलखोन द्वीप पर और उसके आसपास देखने को मिलती है। वहाँ आपको दर्जनों अलग-अलग प्रकार की बर्फ मिलेगी!
चट्टानों पर - हवा और बैकाल की लहरों से बने बर्फ के टीलों और स्तंभों का अनोखा नज़ारा, जिनमें से कई कई मीटर ऊँचे होते हैं।
बर्फ की सतह पर - दरारों और हवा के बुलबुलों के मनमोहक पैटर्न। कहीं पानी लगभग काला दिखता है, मानो पैरों के नीचे अथाह गहराई हो, तो कहीं हल्का नीला और जमी रेत के दानों से सजा हुआ।
दिन में तेज धूप निकलती है और शाम को सूर्यास्त के बाद बर्फ तेजी से ठंडी होकर आवाज़ें करने लगती है, मानो अभी फटने वाली हो। लेकिन बर्फ काफी मजबूत और टिकाऊ होती है, इसलिए स्थानीय लोग बिना किसी डर के इस पर कारों से चलते हैं (और पर्यटकों को घुमाते भी हैं!)।