मॉस्को सेंट्रल सर्कल पर यात्रा करने के 5 फायदे
- 90 मिनट में पूरा शहर देखें
मॉस्को सेंट्रल सर्कल (MCC) की सवारी शहर घूमने का सबसे किफायती तरीका है। यह एक अर्बन-मेट्रो रेलवे ऑर्बिटल लाइन है जो मॉस्को रिंग रेलवे (एक असल रेलवे लाइन) पर चलती है। इसका किराया सिर्फ़ 75 रूबल (लगभग $0.95) है। पूरा चक्कर लगाने में लगभग 90 मिनट लगते हैं: इस दौरान ट्रेन 54 किलोमीटर का सफ़र तय करती है और 31 स्टॉप पर रुकती है। साथ ही, मॉस्को सेंट्रल सर्कल का इस्तेमाल 'हॉप-ऑन-हॉप-ऑफ' रूट के तौर पर भी किया जा सकता है। किसी भी स्टेशन से ट्रेन में चढ़ें, अपनी पसंद के स्टेशन पर उतरें और वापस आ जाएं – इसके लिए एक दिन का पास (415 रूबल; लगभग $5) सबसे अच्छा विकल्प है।
- सूरज उगते हुए देखें या न्यू ईयर की शाम का जश्न मनाएं
MCC स्टेशनों से पहली ट्रेनें सुबह 5:30 बजे निकलती हैं। खिड़की के पास बैठें और मॉस्को में सूरज उगते हुए देखें, जो दिन की शुरुआत करता है। अगर आपको सूर्यास्त के बाद शहर के नज़ारे पसंद हैं, तो कोई बात नहीं: मॉस्को सर्कल रात 1:00 बजे बंद होता है।
वैसे, आप मॉस्को सर्कल पर न्यू ईयर की शाम का जश्न भी मना सकते हैं। न्यू ईयर की शाम को, स्टेशनों और ट्रेनों में 'देद मोरोज़' (रूसी सांता क्लॉज़) दिखाई देते हैं। अपने फेवर्स पहले से प्लान कर लेना बेहतर है! नए साल की शाम पर, MCC बिना रुके चलता है और रात 8:00 बजे से स्टेशन में एंट्री फ्री होती है।
- शांति से काम करें या रोमांटिक डेट पर जाएं
इस सर्कल पर आरामदायक ‘लास्तोचका’ (Lastochka) ट्रेनें चलती हैं: इनमें एयर कंडीशनिंग, पावर आउटलेट, USB चार्जिंग पोर्ट, वाई-फ़ाई और टॉयलेट जैसी सुविधाएं होती हैं। खास बात यह है कि भले ही ये ट्रेनें 160 km/h तक की रफ़्तार से चलती हैं, लेकिन रेल यात्रा के दौरान पहियों की जो खड़खड़ाहट आम तौर पर सुनाई देती है, वह इनमें लगभग न के बराबर होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये सीमलेस रेल पर चलती हैं, जिससे सफर काफी आरामदायक हो जाता है। हर ट्रेन में एक खास “साइलेंट कार” भी होती है: इसमें यात्रियों से कहा जाता है कि वे सफ़र के दौरान अपने फ़ोन म्यूट रखें और उनका इस्तेमाल न करें, साथ ही म्यूज़िक सिर्फ़ हेडफ़ोन लगाकर ही सुनें। इस कार को पहचानने के लिए उस पर एक खास स्टिकर लगा होता है, जिस पर एक आदमी अपनी उंगली होंठों पर रखे हुए दिखता है।
- मॉस्को के मुख्य आकर्षणों को एक अलग नज़रिए से देखें
MCC का रूट राजधानी के हर जिले से होकर गुज़रता है। यानी डेढ़ घंटे की यात्रा में, आप बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के शहर के प्रमुख स्थलों को देख सकते हैं। ट्रेन की खिड़कियों से आपको मॉस्को सिटी की गगनचुंबी इमारतें, लुज़्निकी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ओस्तानकिनो टावर, लोसिनी ओस्त्रोव पार्क, प्राचीन इज़माइलोवो मठ और नोवोदेविची कॉन्वेंट भी दिखेंगे।
- अतीत से भविष्य तक का सफर करें
मॉस्को सेंट्रल सर्कल (MCC), मॉस्को रिंग रेलवे का ही नया रूप है। रिंग रेलवे को 20वीं सदी की शुरुआत में माल और यात्रियों के ट्रांसपोर्ट के लिए बनाया गया था। 'कनात्चिकोवो', 'प्रेस्न्या' और 'लिखोबोरी' स्टेशनों पर आर्ट नोव्यू शैली की स्टेशन बिल्डिंग्स आज भी मौजूद हैं।
इस सर्कल के हाल के इतिहास में एक खास बात है, 'प्लोशचाद गगारिना' स्टेशन से 'लेनिन्स्की प्रोस्पेक्ट' मेट्रो स्टेशन तक एक अनोखा रास्ता। 1960 के दशक में जब मॉस्को रिंग रेलवे पर यात्री सेवा दोबारा शुरू करने की योजना बनी, तो मेट्रो स्टेशन के बीच से एक निकास बनाया गया। लेकिन यह रास्ता आधी सदी तक बंद रहा और MCC प्रोजेक्ट की शुरुआत के साथ ही फिर से खुला।
मॉस्को सेंट्रल सर्कल (MCC) में अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी भी देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, इस रूट पर दो साल से एक ड्राइवरलेस ट्रेन चल रही है। फिलहाल इसे एक ट्रेन ऑपरेटर चला रहा है, लेकिन हाल ही में पूरी तरह ऑटोनॉमस ट्रेन का ट्रायल भी शुरू किया गया है।