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रूस का ‘रजिस्टर ऑफ कंट्रोल्ड परसन्स’: यह क्या है और इससे कैसे बचें

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ब्लैकलिस्ट में नाम आने से बचना है, तो बस अपने दस्तावेज़ों पर नज़र रखिए, उन्हें अपडेटेड रखिए, और रूस के कानूनों का उल्लंघन मत कीजिए। सुनने में आसान लगा, है ना? चलिए, इसे थोड़ा और करीब से समझते हैं।

साल 2025 से रूस में 'रजिस्टर ऑफ कंट्रोल्ड परसन्स' नाम की एक ऑफिशियल लिस्ट मेंटेन की जा रही है, जिसे गृह मंत्रालय संभालता है। इस रजिस्टर में उन सभी विदेशी नागरिकों को डाल दिया जाता है, जिनका देश में रहने का कानूनी अधिकार खत्म हो चुका होता है। ये लिस्ट हर चार घंटे में अपडेट होती है, और इसकी जानकारी सिर्फ सरकारी एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि उन कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन्स को भी मिलती है जो विदेशियों से डील करती हैं। नतीजा? अगर किसी का नाम इस रजिस्टर में आ गया, तो उसे बैंक अकाउंट्स और देश के अंदर ट्रैवल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। और हाँ, डिपोर्टेशन तो पक्का है।

रजिस्टर में किसका नाम आता है और क्यों?

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जो भी विदेशी रूस में रहकर इमिग्रेशन नियम तोड़ता है, उसका नाम इस रजिस्टर में डाल दिया जाता है। कानून में ये आधार साफ बताए गए हैं:

1. दस्तावेज़ों की अवधि खत्म हो गई हो – जैसे टेम्परेरी रेजिडेंस परमिट, रेजिडेंस परमिट, पेटेंट, वर्क परमिट, वीज़ा या कॉन्ट्रैक्ट। या फिर ये दस्तावेज़ रद्द हो गए हों और नए न बने हों।

2. वीज़ा-फ्री देश का कोई विदेशी तीन महीने से ज़्यादा रूस में रह गया हो, लेकिन उसने टेम्परेरी रेजिडेंस परमिट, रेजिडेंस परमिट या पेटेंट जैसे ज़रूरी परमिट नहीं लिए हों। रूस में 90/365 नियम है – मतलब बिना   वीज़ा वाला कोई भी विदेशी एक साल में ज़्यादा से ज़्यादा 90 दिन ही रूस में रह सकता है।

3. उस पर एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपल्शन, डिपोर्टेशन, अनडिज़ायरेबल या एंट्री बैन का ऑर्डर जारी हो चुका हो।

4. उसने गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर पार की हो।

5. बच्चे भी इस लिस्ट में आ सकते हैं – अगर माता-पिता ने बच्चे का कानूनी स्टेटस सही नहीं किया। ऐसे बच्चों का स्कूल या किंडरगार्टन में दाखिला नहीं होगा।

 रजिस्टर में नाम आने पर क्या होता है?

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जब किसी विदेशी का नाम रजिस्टर ऑफ कंट्रोल्ड परसन्स में आ जाता है, तो उस पर ये पाबंदियाँ लग जाती हैं:

  •   गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना रहने की जगह नहीं बदल सकते।
  •   जिस क्षेत्र में रह रहे हैं, उसे छोड़कर नहीं जा सकते (हाँ, रूस छोड़ सकते हैं)।
  •   प्रॉपर्टी या कार न तो बेच सकते हैं, न खरीद सकते हैं।
  •   शादी नहीं कर सकते।
  •   बैंक अकाउंट का इस्तेमाल सीमित तरीके से कर सकते हैं – महीने में ज़्यादा से ज़्यादा 30,000 रूबल (लगभग $400) ही ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।
  •   गाड़ी नहीं चला सकते।

इतना ही नहीं, जिसका नाम इस रजिस्टर में आता है, उसे  गृह मंत्रालय में नियमित रूप से रिपोर्ट करना होता है और सभी कानूनी नियमों को मानना होता है।

आप  गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं कि किसी का नाम इस रजिस्टर में है या नहीं।

अगर किसी का नाम रजिस्टर में आ जाए तो क्या करें?

गृह मंत्रालय

 'ब्राइडेन कंसल्टिंग' लॉ फर्म के निकिता सोकोलोव के मुताबिक, डेटा ऑटोमैटिकली रजिस्टर में डाला जाता है – कुछ खास एल्गोरिदम के आधार पर, न कि मैन्युअली। इसलिए गलती से नाम आने की भी संभावना रहती है। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि सिस्टम पर किसी विदेशी के ओवरस्टे का मामला दिख रहा हो, जबकि असल में उसके नए दस्तावेज़ सिस्टम पर अपडेट नहीं हुए हैं।

निकिता कहते हैं: "अगर किसी का नाम गलती से रजिस्टर में आ गया है, तो उन्हें या तो गृह मंत्रालय की हेल्पलाइन पर कॉल करनी चाहिए, या फिर अपने रजिस्ट्रेशन वाले इलाके के माइग्रेशन ऑफिस में जाकर रजिस्टर से नाम हटाने का अनुरोध करना चाहिए। साथ में अपने कानूनी स्टेटस को दिखाने वाले दस्तावेज़ भी देने होंगे। उसके बाद, अगर बैंक कार्ड ब्लॉक हुए हैं, तो बैंक से भी संपर्क कर सकते हैं।" आप गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी अप्लिकेशन जमा कर सकते हैं।

गृह मंत्रालय इस अनुरोध पर 30 दिन के अंदर जवाब देता है – लेकिन अक्सर इससे पहले ही काम हो जाता है। अगर उनका जवाब पॉज़िटिव आता है, तो सारी पाबंदियाँ हट जाती हैं।

निकिता आगे बताते हैं:  "लेकिन अगर किसी का नाम सही में रजिस्टर में आ गया है – मतलब उसने वाकई इमिग्रेशन के नियम तोड़े हैं – तो उसके पास दूसरा विकल्प नहीं है। उसे रूस छोड़ना पड़ेगा और अपनी गलती सुधारनी होगी। जैसे, अगर नाम ओवरस्टे की वजह से आया है, तो उसे रूस से बाहर निकाल दिया जाएगा और साथ ही कुछ समय के लिए दोबारा एंट्री पर बैन भी लग जाएगा। उसे इस आदेश का पालन करना होगा, और फिर वह दोबारा रूस आ सकता है।