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साइबेरिया का नया मॉडर्न सिंक्रोट्रॉन क्यों है दुनिया के लिए अहम

Rosatom
नोवोसिबिर्स्क में एक बड़ा साइंटिफिक सेंटर खोला गया है।

नोवोसिबिर्स्क में एक अनोखी तकनीकी संरचना अस्तित्व में आई है – साइबेरियन रिंग फोटॉन सोर्स (SKIF)। यह एक साझा अनुसंधान केंद्र है, जहाँ सैकड़ों वैज्ञानिक एक साथ काम कर सकते हैं और नई खोजें कर सकते हैं। इस विशाल परिसर में 34 बिल्डिंग हैं, जो 90,000 वर्ग मीटर में फैली हैं।  

पहले प्रयोग अगस्त 2026 में ही शुरू हो जाएँगे, और सितंबर में इसे पूरी क्षमता से चालू करने की योजना है।

SKIF कैसे काम करता है?

Sergei Fadeichev / TASS

सीधे शब्दों में कहें तो, SKIF एक सिंक्रोट्रॉन है। और सिंक्रोट्रॉन क्या है? यह पदार्थ के स्ट्रक्चर और गुणों का अध्ययन करने वाला एक उपकरण है। नोवोसिबिर्स्क में यह 476-मीटर रिंग के आकार का एक एक्सेलरेटर है जो एक बड़े स्पेक्ट्रम में खास तरह का ‘सिंक्रोट्रॉन’ रेडिएशन उत्पन्न करता है।

(थोड़ा विज्ञान: चार्ज्ड पार्टिकल्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड में प्रकाश की गति से एक सर्कल में घूमते हैं – और इसी से वह रेडिएशन बनता है।)

Alexander Kryazhev / Sputnik

यह सिंक्रोट्रॉन रेडिएशन, आम एक्स-रे से लाखों गुना ज़्यादा तेज़ होता है। इससे यह किसी भी चीज़ में गहराई तक और उन संरचनाओं को देख सकता है, जिन्हें वैज्ञानिक पहले कभी नहीं देख पाए थे।

नए साइबेरियन सिंक्रोट्रॉन में क्या खास है?

इससे पहले रूस में दो सिंक्रोट्रॉन थे – एक मॉस्को के कुरचातोव इंस्टिट्यूट में और दूसरा नोवोसिबिर्स्क में रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स का एक्सेलरेटर कॉम्प्लेक्स।

Alexander Kryazhev / Sputnik

इस नए वैज्ञानिक केंद्र में रूस का पहला 4+ जेनरेशन सिंक्रोट्रॉन है - जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली सिंक्रोट्रॉन में से एक है। पुरानी मशीनों में, पार्टिकल बीम कुछ बिखरी हुई होती थी, मगर नई मशीन में यह बहुत फोकस्ड और संकुचित होती है। आसान शब्दों में, यह टॉर्च से लेज़र पॉइंटर पर स्विच करने जैसा है, इसलिए बीम की सटीकता और नतीजे कहीं बेहतर है।

इसका असली फायदा क्या है?

Alexander Kryazhev / Sputnik

वैज्ञानिक इस अल्ट्रा-सटीक सुपर-लाइट को किस दिशा में इस्तेमाल करेंगे और किन क्षेत्रों में यह उपयोगी होगा?

  •  पुरातत्व, भूविज्ञान और जीवन विज्ञान

वैज्ञानिक पुरातात्विक खोजों और जीवाश्मों के अंदर देख पाएँगे, जिससे उन्हें पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे में नई जानकारी मिलेगी और लाइफ़ साइंसेज़ और मैटेरियल्स साइंस में नई खोजें होंगी। हम इस बारे में और जान सकेंगे कि हमारे पूर्वज और यहाँ तक कि डायनासोर कैसे रहते थे।

Alexander Kryazhev / Sputnik

इस सिंक्रोट्रॉन का उपयोग जैविक अवशेषों और कला-कृतियों में मौजूद सामग्रियों के अध्ययन के लिए भी किया जा सकता है। कुछ साल पहले, कुरचातोव इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने सिंक्रोट्रॉन का उपयोग करके एक प्राचीन मिस्र की ममी का स्वरूप और उसके रोगों का पता लगाया।

  • उद्योग, अंतरिक्ष और एनर्जी इंजीनियरिंग

शोधकर्ता यह जान पाएंगे कि बहुत ज़्यादा दबाव, तापमान और इम्पैक्ट लोड जैसी बहुत ज़्यादा मुश्किल हालात में मटीरियल कैसे काम करते हैं। इससे वैज्ञानिक खोजों को औद्योगिक उपयोग में लाने की प्रक्रिया तेज होगी। रशियन एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ के मुताबिक, सिंक्रोट्रॉन एविएशन, अंतरिक्ष और ऊर्जा के लिए खास मटीरियल बनाने में मदद करेगा, साथ ही तेल-गैस के लिए नए कैटलिस्ट और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में अत्याधुनिक तकनीकों को भी विकसित करेगा।

Sergei Fadeichev / TASS

मेडिसिन

सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिंक्रोट्रॉन चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत काम आएगा। वैज्ञानिक वायरसों को और बारीकी से समझ पाएंगे, उनके गुण और उनका व्यवहार। इस गहन अध्ययन से ऐसी दवाइयाँ बनाने में मदद मिलेगी, जो सटीक लक्ष्य पर काम करें। यह नए कृत्रिम अंगों और जॉइंट्स को डिज़ाइन करने में भी सक्षम हो सकता है। इसके अलावा, यह मस्तिष्क के उन गुणों को उजागर कर सकता है, जिनके बारे में अब तक कुछ पता नहीं था।