बर्लिन की हार के बाद कैसे लौटीं एक रूसी आर्टिस्ट की पेंटिंग्स

New Jerusalem Museum
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सोवियत सैनिकों को 1945 में बर्लिन के एक अपार्टमेंट की दीवारों पर लगी कुछ पेंटिंग्स मिलीं — जिनमें बर्च के जंगल, ऑर्थोडॉक्स चर्च, वोल्गा नदी, पस्कोव, नोवगोरोद, सेंट पीटर्सबर्ग, इटली का रिवियेरा और वेनिस का पियाज़ा सैन मार्को के नज़ारे थे।
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ये सभी पेंटिंग्स मशहूर रूसी पेंटर कोंस्तांतिन गोर्बातोव ने बनाई थीं और ये उस अपार्टमेंट में मिलीं, जहाँ वह अपनी पत्नी के साथ रहते थे। 1922 में गोर्बातोव रूस से निकलकर यूरोप चले गए और उन्हें रूस के सबसे सफल कलाकारों में गिना जाने लगा। कैप्री और अमाल्फी के नज़ारों वाली उनकी पेंटिंग्स बहुत मशहूर हुईं। मगर उन्होंने रूसी लैंडस्केप बनाना भी कभी नहीं छोड़ा।

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जंग के दौरान वह जर्मनी में थे। देश छोड़ना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें पुलिस में हाजिरी देनी पड़ी। 24 मई, 1945 को उनका निधन हो गया और एक महीने से भी कम समय बाद उनकी पत्नी भी चल बसी। इन पेंटिंग्स का भविष्य उस चिट्ठी से तय हुआ जो उनके अपार्टमेंट से मिली थी — जिसमें उन्होंने लिखा था कि उनकी पेंटिंग्स उनके वतन भेज दी जाएँ।

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1946 में ये सारी पेंटिंग्स सोवियत संघ भेजी गईं और जल्द ही मॉस्को रीजनल म्यूज़ियम ऑफ़ लोकल हिस्ट्री, जिसे अब न्यू जेरूसलम म्यूज़ियम कहा जाता है के संग्रह में शामिल हो गईं।

*अगर आप इस पेंटर के काम के बारे में और जानना चाहें, तो '(UN)famous.कोंस्तांतिन गोर्बातोव' प्रदर्शनी देख सकते हैं — जो 30 अगस्त तक न्यू जेरूसलम म्यूज़ियम में लगी है।

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