यह भाषाविद् कुछ ही घंटों में किसी को भी कोई भी भाषा सिखा सकते थे

Gateway to Russia (Photo: Birchbark Literacy from Medieval Rus (CC BY 1.0), Grigory Sysoyev/TASS)
Gateway to Russia (Photo: Birchbark Literacy from Medieval Rus (CC BY 1.0), Grigory Sysoyev/TASS)
बचपन में आंद्रेई ज़ालिज़न्याक से कहा गया था कि उनमें भाषाएँ सीखने की कोई खास प्रतिभा नहीं है। लेकिन बाद में साबित हुआ कि वो एक जीनियस थे। वो ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने कंप्यूटर सिस्टम को भी रूसी भाषा पहचानना सिखाया।

रूसी शब्द ‘Окно’ (ओक्नो – खिड़की)। यह एक संज्ञा, निर्जीव, नपुंसक लिंग की है और दूसरे विभक्ति वर्ग में आती है (ए. ए. ज़ालिज़न्याक की वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार)।

अगर आप किसी भी रूसी शब्द को सर्च इंजन में टाइप करें, तो उसके व्याकरण से जुड़े सभी विवरण मिल जाते हैं, जिनमें ज़ालिज़न्याक का वर्गीकरण भी शामिल होता है। लेकिन आखिर यह ज़ालिज़न्याक थे कौन?

भाषा की प्रतिभा

आंद्रेई ज़ालिज़न्याक (1935–2017) एक प्रसिद्ध भाषाविद् थे और रूसी भाषा व उसके इतिहास के बड़े विशेषज्ञ थे। उन्हें अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, स्वीडिश, अरबी और यहाँ तक कि प्राचीन फ़ारसी कीलाक्षर (क्यूनिफ़ॉर्म) लिपि भी आती थी।

उन्होंने अपना पूरा जीवन भाषाविज्ञान को समर्पित कर दिया। उनका लगन इतना गहरा था कि वे एक पांडुलिपि में सुधार करते हुए ही अपने डेस्क पर दुनिया से विदा हो गए।

उनका मानना था कि कोई भी भाषा, यहाँ तक कि अरबी भी, कुछ ही घंटों में सीखी जा सकती है। उन्होंने इसके लिए अपनी एक खास प्रणाली बनाई, जिसे उन्होंने अपने छात्रों पर सफलतापूर्वक आज़माया।

भाषाओं के प्रति उनका प्रेम बिल्कुल संयोग से शुरू हुआ। स्कूल के दिनों में एक बार सिर में चोट लगने के कारण वे घर पर आराम कर रहे थे। उन्हें बहुत बोरियत हो रही थी। तभी उनकी नज़र एक फ़्रेंच किताब पर पड़ी और समय काटने के लिए उन्होंने उसे पूरा याद कर लिया।

कंप्यूटर को पढ़ना सिखाना

ज़ालिज़न्याक ने मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के फ़िलोलॉजी विभाग से पढ़ाई की और फिर एक छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत फ़्रांस गए। वहाँ उन्हें विदेशी छात्रों को रूसी पढ़ाने का मौका मिला। फ़्रांसीसी छात्रों को रूसी भाषा के रूप (declensions) समझाने के लिए उन्होंने कार्ड्स पर अपना खुद का शब्दकोश बनाया। यहीं से रूसी शब्दों के नए वर्गीकरण का विचार पैदा हुआ।

बाद में उनकी लिखी ‘रूसी भाषा का व्याकरणिक शब्दकोश’ रूस के पहले कंप्यूटर सर्च सिस्टम, स्पेल-चेक और टेक्स्ट पहचान तकनीक की नींव बना।

प्राचीन भाषाओं के विशेषज्ञ

ज़ालिज़न्याक को प्राचीन रूस की भोजपत्र (बर्च बार्क) पांडुलिपियों से खास लगाव था। यह रुचि भी संयोग से ही शुरू हुई, जब एक दोस्त ने उन्हें ऐसी कुछ पांडुलिपियाँ दिखाईं। 11वीं–12वीं सदी की ये लिखित चिट्ठियाँ उनके शोध का बड़ा विषय बन गईं। उन्होंने एक ऐसी पांडुलिपि भी पढ़ ली, जिसे समझने में विज्ञान अकादमी को लगभग 40 साल लग गए थे।

इसके बाद यह “कुर्सी पर बैठकर काम करने वाला” विद्वान खुद अभियान पर निकल पड़ा और नई पांडुलिपियों की खोज में वेलिकी नोवगोरोद जाने लगा। मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी में उनके लेक्चर इतने लोकप्रिय थे कि हॉल हमेशा भरे रहते थे।

ज़ालिज़न्याक ने रूसी साहित्य की सबसे पुरानी कृतियों में से एक ‘इगोर के अभियान की कथा’ का भी गहराई से अध्ययन किया। इस काम के लिए उन्हें राज्य पुरस्कार मिला। उन्होंने यह शोध सिर्फ जिज्ञासा से शुरू किया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह रचना असली है या नहीं, क्योंकि इस पर अक्सर विवाद होता रहता था।

हालाँकि उनका काम सिर्फ पुरानी रूसी भाषा तक सीमित नहीं था। उन्होंने संस्कृत, प्राचीन हिब्रू, पुरानी भारतीय भाषाएँ और कई दूसरी भाषाएँ भी गहराई से पढ़ीं।