'अपने अंदाज़ में' — इस रूसी मुहावरे के पीछे की अनसुनी कहानी

Kira Lisitskaya (Photo: Maxim Dmitriev/MAMM/MDF; Legion Media; Open AI)
Kira Lisitskaya (Photo: Maxim Dmitriev/MAMM/MDF; Legion Media; Open AI)
"Делать все на свой манер" या "देलत व्से ना स्वोई मानेर" — यानी "सब कुछ अपने अंदाज़ में करना"। यह मुहावरा आज भी बहुत इस्तेमाल होता है। इसका मतलब है किसी काम को "अपने तरीके से" करना, पर इसके पीछे एक अनोखी कहानी है जो पुराने टेक्सटाइल कारोबार से जुड़ी है।

'манер' (ढंग) या 'манера' शब्द 18वीं सदी में फ्रेंच से रूसी भाषा में आया। 'Manière' का मतलब है किसी काम को करने का 'तरीका' या 'ढंग' — अंग्रेज़ी में यह 'manners' जैसा ही है। रूसी में लोग 'хорошие манеры' (अच्छे संस्कार) कहते हैं, जिसका मतलब है समाज में रहने का सलीका — यानी शिष्टाचार और अच्छी परवरिश का पालन करना। लेकिन "делать на свой манер" का मतलब है सब कुछ अपने निजी अंदाज़ से करना।

इस मुहावरे से जुड़ी एक और दिलचस्प कहानी है। जिन इलाकों में हैंडलूम का काम होता था, वहाँ 'манер' नाम के नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक इस्तेमाल होते थे — जिनसे कपड़े पर डिज़ाइन छापे जाते थे। हर कारीगर का अपना 'манер' होता था, और उस पर उसकी अपनी अलग-सी डिज़ाइन होती थी।

The State Russian Museum 'मानेर' प्रिंटेड बोर्ड
The State Russian Museum

वैसे, इस काम में काफी स्किल की ज़रूरत होती थी — क्योंकि डिज़ाइन को हाथ से ब्लॉकों के ज़रिए लगाना होता था, और इस तरह से कि कोई सिलाई नज़र न आए, न डिज़ाइन गड़बड़ाए, और न उसका पैटर्न बिगड़े।

Yury Abramochkin / Sputnik कपड़े पर रंगीन पैटर्न की मैन्युअल प्रिंटिंग
Yury Abramochkin / Sputnik