रूसी सम्राटों का वंशज ब्रिटिश नौसेना में नाविक कैसे बना?
प्रिंस आंद्रेई आंद्रेयेविच रोमानोव का जन्म 1923 में ब्रिटेन में हुआ था। उनके माता-पिता रूसी गृहयुद्ध के दौरान रूस छोड़कर वहां चले गए थे। वे सम्राट अलेक्ज़ांडर तृतीय के परपोते और निकोलस द्वितीय के भतीजे के बेटे थे। “मेरी दादी (निकोलस द्वितीय की बहन, ग्रैंड डचेस ज़ेनिया अलेक्ज़ांद्रोव्ना) अपने साथ अपने सभी नौकरों को इंग्लैंड ले आई थीं। उनके साथ उनकी निजी सहायिका, रसोइया और कई दूसरे लोग भी थे। वो सभी विंडसर में बस गए, जहां राजा ने उनके रहने के लिए घर दिया था,” प्रिंस ने याद करते हुए बताया। बचपन में उनके गॉडफादर वेल्स के राजकुमार एडवर्ड थे, जो उस समय ब्रिटिश सिंहासन के उत्तराधिकारी थे। आंद्रेई ने अपना पूरा बचपन और युवावस्था विंडसर कैसल में बिताई। वहीं उन्होंने पढ़ाई की और शाही परिवार के बच्चों के साथ खेलते-कूदते बड़े हुए। इन्हीं बच्चों में आगे चलकर ब्रिटेन की महारानी बनी एलिज़ाबेथ भी शामिल थीं। 1942 में आंद्रेई आंद्रेयेविच ने स्वेच्छा से ब्रिटिश नौसेना जॉइन कर ली। उन्होंने अफसर बनने का मौका ठुकरा दिया और ‘शेफील्ड’ नाम के हल्के युद्धपोत पर एक आम नाविक के तौर पर सेवा की। यह जहाज़ उन मित्र देशों के मालवाहक जहाज़ों की सुरक्षा करता था, जो मुर्मांस्क तक हथियार पहुंचाते थे। इसी वजह से बोल्शेविक क्रांति के बाद प्रिंस आंद्रेई रूस आने वाले पहले रोमानोव बन गए। दिलचस्प बात यह है कि 1917 से पहले इस शहर का नाम ‘रोमानोव-ना-मुर्माने’ हुआ करता था। बाद के वर्षों में वो कई बार अपने पूर्वजों की धरती रूस लौटे। यहां उन्होंने अपनी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई और रोमानोव परिवार से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वो अपने शाही परिवार के पहले सदस्य भी बने, जिन्होंने येकातेरिनबुर्ग जाकर निकोलस द्वितीय की हत्या वाली जगह देखी।