कैसे एक रूसी राजकुमारी दुनिया की पहली महिला सैन्य पायलट बनी

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येवगेनिया शाखोव्स्काया ने बहुत ही अनोखी ज़िंदगी जी। वह रूसी शाही सेना की पायलट बनीं और बाद में सोवियत खुफिया एजेंसी के लिए काम किया।

साल 1910 की बात है। येवगेनिया सिर्फ 21 साल की थीं। सेंट पीटर्सबर्ग में उन्होंने एक फ्रांसीसी महिला पायलट, रेमंड डे लारोश, का एयर शो देखा। बस फिर क्या था? राजकुमारी को उड़ने का ऐसा जुनून चढ़ा कि तुरंत ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। दो साल बाद उन्होंने जर्मनी में राइट ब्रदर्स के फ्लाइट स्कूल से पायलट का लाइसेंस हासिल कर लिया।

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ट्रेनिंग पूरी भी नहीं हुई थी कि वह बाल्कन और उत्तरी अफ्रीका में लड़ाईयों में हिस्सा लेना चाहती थीं। उनका सपना था – "500 मीटर की ऊँचाई से दुश्मन पर मौत बरसाना और उनकी गोलियों की आवाज़ सुनना, जब वे हमारे पीछे पड़े हों!"

लेकिन उस समय उन्हें मोर्चे पर जाने का मौका नहीं मिला। इसलिए वह जर्मनी में ही रहीं और महिला पायलटों को ट्रेनिंग देने लगीं। 1913 में वह एक भयंकर विमान हादसे में बाल-बाल बचीं। इसके बाद उन्होंने सोचा कि अब उड़ना छोड़ देना चाहिए। लेकिन जैसे ही पहला विश्व युद्ध शुरू हुआ, उनका मन फिर बदल गया।

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राजकुमारी ने खुद ज़ार निकोलस द्वितीय से गुहार लगाई कि उन्हें लड़ाकू पायलट बनाकर मोर्चे पर भेजा जाए। 1 दिसंबर 1914 को उन्हें "फ़र्स्ट आर्मी एविएशन डिटैचमेंट" में शामिल किया गया। वहाँ उन्होंने जासूसी उड़ानें (टोही मिशन) भरीं। लेकिन उनकी यह नौकरी ज़्यादा दिन नहीं चली। 1915 में उन पर जर्मनी के लिए जासूसी करने का आरोप लगा। उन्हें टुकड़ी से निकाल दिया गया और उन्हें कैद कर लिया गया।

1917 में बोल्शेविक क्रांति हुई, जिससे शाखोव्स्काया जेल से छूट गईं। कुछ दिनों तक उन्होंने गैचिना (Gatchina) म्यूज़ियम में काम किया, लेकिन चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दी गईं। उसके बाद उन्हें 'चेका' (रूस की राज्य सुरक्षा एजेंसी) में नौकरी मिल गई। वहाँ उन्होंने पहले मुखबिर (गुप्त जानकारी देने वाली) की भूमिका निभाई और बाद में कीव में जासूसी मामलों की पड़ताल करने लगीं। कहा जाता है कि वह पूछताछ के समय बहुत ज़्यादा सख्ती बरतती थीं।

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तब तक शाखोव्स्काया को शराब और कोकीन की लत लग चुकी थी। मॉर्फीन की लत तो उन्हें उस हादसे के बाद से ही थी जो 1913 में हुआ था। आखिरकार, 1920 में राजकुमारी की मौत हो गई। एक कहानी के मुताबिक, नशे में हुए झगड़े के दौरान उनके ही साथियों ने उन्हें गोली मार दी।

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