1941 में मॉस्को मेट्रो पूरी तरह से एक अंडरग्राउंड शहर कैसे बन गई
स्टेशनों पर सोने की जगह, टॉयलेट, पानी, लाइट और बैकअप सब कुछ था। छोटे बच्चों वाली माँएं, बुजुर्ग और दिव्यांग लोग प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों के डिब्बों में रहते थे। बाकी लोग कंबल और गद्दे लेकर सुरंगों में रात बिताते थे।
अंदर ही अंदर दुकानें, सैलून, लाइब्रेरी, सिनेमा और कॉन्सर्ट हॉलभी थे। बड़े लोग अंडरग्राउंड वर्कशॉप में हथियार बनाते और ठीक करते थे, और बच्चे पढ़ाई करते थे। मेट्रो ने हॉस्पिटल का भी काम किया – यहाँ 200 से ज़्यादा बच्चों का जन्म हुआ!
'किरोव्स्काया' स्टेशन (अब 'चिस्ती प्रुडी') पर स्टालिन और उनकी सेना के लिए एक गुप्त कमांड सेंटर बनाया गया था। हवाई हमले के दौरान रक्षा मंत्रालय के सारे बड़े अफसर यहाँ आते थे।
6 नवंबर 1941 को 'मायाकोव्स्काया' स्टेशन पर क्रांति की सालगिरह का जश्न मनाया गया। स्टालिन ने वहाँ भाषण दिया, जो पूरे देश में लाइव प्रसारित हुआ। अंत में रेड आर्मी के गायकों और डांसर्स ने परफॉर्म किया।
1942 की गर्मियों तक बमबारी चलती रही। आखिरी जर्मन बमवर्षक जून 1943 में आया। उसके बाद लोगों ने अंडरग्राउंड छुपना छोड़ दिया, लेकिन मेट्रो युद्ध के आखिरी दिन तक बम शेल्टर बनी रही।