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वह शांति संधि जिसने रूस को बनाया महाशक्ति

Alexey Kivshenko
स्वीडन करीब एक सदी तक एक बड़ी ताकत रहा, लेकिन उसे हराने के बाद रूस ने खुद यह मुकाम हासिल कर लिया।

ठीक 300 साल पहले, 10 सितंबर, 1721 को रूस के इतिहास का सबसे अहम समझौता हुआ। निस्टाड संधि ने 21 साल लंबे महान उत्तरी युद्ध का अंत किया, जहाँ स्वीडन और रूस आमने-सामने थे। अगर स्वीडन के लिए इसका मतलब था अपनी 'बड़ी ताकत' वाली हैसियत खोना, तो रूस के लिए इसका उलट था। इसने रूस के लिए नए दौर की शुरुआत की और उसे दुनिया की ताकतवर देशों की कतार में ला खड़ा किया।

17वीं सदी का अंत: स्वीडन का स्वर्णिम दौर

20 अगस्त 1721 को निस्टाड शांति संधि का निष्कर्ष।
Fine Art Images/Heritage Images/Getty Images

17वीं सदी के आखिर तक स्वीडन अपने चरम पर पहुँच चुका था। फिनलैंड और बाल्टिक इलाकों पर कब्जे के साथ, स्वीडन ने बाल्टिक सागर को मानो अपनी निजी झील बना लिया था। स्वीडन की फौज और नौसेना यूरोप की सबसे मजबूत सेनाओं में गिनी जाती थी।

राजा चार्ल्स XII
Public Domain

एक नौजवान राजा का उदय

स्वीडन के राजा चार्ल्स XII
Michael Dahl

मगर स्वीडन की अपनी कमजोरियाँ भी थीं - उसकी आबादी कम थी और संसाधन सीमित। इस वजह से वह अपनी लंबी सीमाओं की हिफाजत आसानी से नहीं कर पाता था। ऐसे में स्वीडनवाले अपनी फौज के तेजी से आगे बढ़ने, उनकी बेहतर लड़ाई की क्षमता, अपने कमांडरों की चतुराई और राजा के मजबूत इरादों पर भरोसा करते थे। जब 1697 में 15 साल का अनुभवहीन चार्ल्स बारहवें राजा बना, तो कई यूरोपीय देशों को लगा कि मौका है इस पुराने दुश्मन को एक साथ मिलकर हराने का।

राजा ऑगस्टस द स्ट्रॉन्ग।
Louis de Silvestre

गठबंधन बनता है

नरवा की लड़ाई।
Alexander von Kotzebue

1699 में बने उत्तरी गठबंधन में रूस, डेनमार्क और पोलैंड-लिथुआनिया शामिल थे। इन देशों ने पहले स्वीडन से हार झेली थी और अब वे अपनी जमीन वापस पाना चाहते थे। रूस का मकसद था बाल्टिक सागर तक फिर से पहुँच बनाना, जो उसने 17वीं सदी की शुरुआत में खो दी थी।

चार्ल्स बारहवाँ: एक मुश्किल दुश्मन

सम्राट पीटर प्रथम
Adolf Charlemagne.

सहयोगियों के लिए हैरानी की बात थी कि चार्ल्स बारहवाँ उनकी सोच से कहीं ज्यादा ताकतवर निकला। 4 अगस्त, 1700 को वह अचानक 15,000 सैनिकों के साथ कोपेनहेगन पहुँचा और डेनमार्क को शांति के लिए मजबूर कर दिया। उसी साल 30 नवंबर को उसने रूस के ज़ार पीटर प्रथम को नार्वा की लड़ाई में बुरी तरह हराया। करीब 8,000 रूसी सैनिक मारे गए और बहुत सारी तोपें स्वीडन के हाथ लगीं। सिर्फ कुछ रेजिमेंट ही डटी रह सकीं, बाकी भाग खड़े हुए।

रूस फिर से तैयार होता है

चार्ल्स ने सोचा कि रूस अब खत्म हो गया है और वह पोलैंड की तरफ चला गया। मगर पीटर प्रथम ने हार नहीं मानी। उसने इस मौके का फायदा उठाकर एक नई और बेहतर फौज तैयार की। अगले कुछ सालों में रूस ने स्वीडन के इलाकों पर कब्जा कर लिया और 1703 में सेंट पीटर्सबर्ग शहर बसाया। ज़ार ने चार्ल्स को शांति का प्रस्ताव भेजा, मगर चार्ल्स ने जवाब दिया: "शांति की बातचीत मास्को में करेंगे!"

नरवा की लड़ाई।
Alexander von Kotzebue

1708 में स्वीडिश फौज रूस में घुस गई। चार्ल्स ने यूक्रेन का रुख किया जहाँ उसे स्थानीय नेता इवान माज़ेपा का समर्थन मिलने का वादा था। मगर अब रूसी फौज वह नहीं थी जो नार्वा में लड़ी थी।

मोड़ की घड़ी

पोल्टावा की लड़ाई के बाद स्वीडन के चार्ल्स XII और इवान माज़ेपा।
Gustaf Olof Cederström

9 अक्टूबर, 1708 को लेसनाया के मैदान में पीटर प्रथम ने स्वीडन की आपूर्ति टुकड़ी को धूल चटा दी। फिर 8 जुलाई, 1709 को पोल्टावा की बड़ी लड़ाई में चार्ल्स बारहवाँ खुद बुरी तरह हार गया। स्वीडन के 9,000 सैनिक मारे गए जबकि रूस के सिर्फ 5,000। जीत के बाद पीटर ने पकड़े गए स्वीडिश अफसरों को दावत दी और कहा: "आप मेरे उस्ताद रहे हैं युद्ध की कला में।"

राजा चार्ल्स XII का अंतिम संस्कार जुलूस।
Gustaf Olof Cederström

पोल्टावा की हार के बाद डेनमार्क और पोलैंड फिर से युद्ध में कूद पड़े। रूसी फौज ने बाल्टिक इलाके पर कब्जा कर लिया और 1719 में तो स्वीडन की जमीन पर भी हमला किया। आखिरकार 1721 में स्वीडन के नए राजा फ्रेडरिक प्रथम ने शांति के लिए हामी भर दी।

नतीजा

सम्राट पीटर महान
Maria Giovanna Clementi

स्वीडन ने रूस को एस्टोनिया, लातविया और इंगरमैनलैंड के इलाके हमेशा के लिए दे दिए। बदले में रूस ने स्वीडन को एक बड़ी रकम अदा की। 2 नवंबर, 1721 को पीटर प्रथम ने 'पीटर द ग्रेट, सभी रूस के सम्राट' की उपाधि ली। इस तरह रूस आधिकारिक तौर पर एक साम्राज्य बन गया।

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