रूस की जातीय समूह: दरगिन लोग
यह उत्तरी काकेशस के स्वदेशी लोगों में से एक है, जिनकी संख्या 6,00,000 से अधिक है। इनमें से अधिकांश दागेस्तान गणराज्य में रहते हैं। एक सिद्धांत के अनुसार, 'दरगिन' नाम शब्द 'दार्ग' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'अंदर'। यह बताता है कि ये लोग मूल रूप से पहाड़ों के भीतरी इलाकों में रहते थे।
प्राचीन काल में, दरगिन लोग ईसाई धर्म को मानते थे। इस्लाम 7वीं-8वीं शताब्दी में अरब आक्रमणों के दौरान क्षेत्र में फैलना शुरू हुआ और 14वीं शताब्दी में तैमूरलंग (टैमरलेन) की सेना के आक्रमण के बाद यह प्रमुख धर्म बन गया।
Rudolf Dik
दरगिन लोग कुशल धातु कारीगरों के रूप में जाने जाते हैं। कुबाची गाँव इस शिल्प का केंद्र है। वहाँ बनाए गए आभूषण, टेबलवेयर और कीमती धातुओं से जड़ित हथियार दुनिया भर में मशहूर हो गए हैं। इनमें से कुछ कृतियाँ पेरिस के 'लौवर' और न्यूयॉर्क के 'मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट' में भी मिल सकती हैं।
Yuri Somov
दरगिन का मुख्य व्यंजन 'खिन्कल' है। यह आटे का एक टुकड़ा होता है जिसे मांस के शोरबे (ब्रोथ) में उबाला जाता है, ऊपर से कटी हुई सूखी नटग्रास डाली जाती है, और इसे शोरबे, उबले हुए मांस और सॉस के साथ परोसा जाता है। दरगिन लोग 'चुदू' भी बहुत पसंद करते हैं – यह एक पतली रोटी (फ्लैटब्रेड) है जिसमें मक्के का आटा, मांस, चीज़ और हर्ब्स भरी जाती हैं।