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मॉस्को मेट्रो के सबसे खूबसूरत स्टेशन: 'मायाकोव्स्काया'

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'ज़मोस्क्वोरेत्स्काया' (ग्रीन) लाइन पर स्थित यह स्टेशन 1938 में खोला गया था और इसकी खासियत है स्टील के खंभे और सोवियत मोज़ेक, दोनों का अद्भुत संगम।

स्टेशन का नाम प्रसिद्ध सोवियत कवि व्लादिमीर मायाकोवस्की के नाम पर रखा गया था। यह दुनिया का पहला डीप-लेवल कॉलम-टाइप स्टेशन बना, जिसमें एक ही प्लेटफॉर्म था। मायाकोव्स्काया स्टेशन के डिज़ाइन को 1939 में न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वर्ल्ड्स फेयर’ में ग्रांड प्रिक्स मिला था। अमेरिकियों को इसका आर्ट डेको अंदाज़ बहुत पसंद आया।

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इस स्टेशन की सबसे खास विशेषताओं में से एक है इसके स्टील के खंभे। मेट्रो स्टेशन के डिज़ाइन में पहली बार ऐसे मटीरियल का इस्तेमाल किया गया था।

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स्टेशन को स्माल्ट से बने 34 मोज़ेक पैनल से भी सजाया गया है, जिन पर ‘अ डे इन द सोवियत स्काय’ थीम दिखाई गई है। इन्हें मोज़ेक आर्टिस्ट अलेक्सांद्र फ्रोलोव ने प्रसिद्ध सोवियत पेंटर अलेक्सांद्र देनेका के स्केच के आधार पर बनाया था।

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ये मोज़ेक स्टेशन की गुम्बदनुमा छतों में लगे हैं और दीवारों पर लगे लैंपों की रोशनी में ऐसे लगते हैं जैसे आसमान में तैर रहे हों।

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आइए, मोज़ेक के इन नज़ारों को करीब से देखें: एक वॉलीबॉल मैच…

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...पैराट्रूपर्स...

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...पैराशूट...—

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...गोताखोर..

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...मॉस्को क्रेमलिन के ऊपर उड़ते बाइप्लेन...

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…रात में बाइप्लेन…

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…सीगल…

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"कंस्ट्रक्शन वर्क्स"

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...सोवियत झंडा...

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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस स्टेशन को बम शेल्टर की तरह इस्तेमाल किया जाता था, और सैकड़ों मस्कोवाइट यहाँ रात गुज़ारते थे।

आजकल मायाकोव्स्काया में रात को शादियाँ, प्रदर्शनियाँ और कॉन्सर्ट भी होते हैं।

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