मॉस्को में भी एक 'चाइनाटाउन' है, लेकिन इसका चीन से कोई लेना-देना नहीं है!
‘Китай-город’ (किताय-गोरोद) मॉस्को के सबसे पुराने इलाकों में से एक है, जो शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित है। इसी नाम से एक मेट्रो स्टेशन भी है।
किताय-गोरोद मेट्रो स्टेशन के पास बार
16वीं सदी में, इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 'किताय-गोरोद दीवार' बनाई गई थी — यह क्रेमलिन के सामने सुरक्षा की एक अतिरिक्त दीवार थी। आज उस दीवार के कुछ ही हिस्से बचे हैं।
किताय-गोरोद दीवार का एक अवशेष
लेकिन, आखिर ऐसा क्यों है कि मॉस्को के 'चाइनाटाउन' में कभी चीनी लोग नहीं रहे?
असल में, ‘Китай-город’ नाम की उत्पत्ति कुछ और ही है। इसके पीछे कई सिद्धांत हैं:
- एक सिद्धांत पुराने रूसी शब्द ‘кита’ (किता) से जुड़ा है, जिसका मतलब होता है लकड़ी के खूँटों का बंडल, जो दीवार बनाने के काम आते थे।
- दूसरा सिद्धांत इतालवी शब्द ‘cittadella’ (चित्तदेल्ला) से मेल खाता है, जिसका अर्थ है 'किला' — और यह दीवार भी एक इतालवी आर्किटेक्ट पेट्रोक मालोय ने ही बनाई थी।
- एक और सिद्धांत इसे तुर्किक शब्द ‘катай’ (काताई) से जोड़ता है, जिसका मतलब भी 'शहर' या 'किला' ही है।
मॉस्को, 1913। बायीं तरफ पीछे व्लादिमीर्स्की गेट देखे जा सकते हैं।
ज़ारों (सम्राटों) के दौर में, ‘Китай-город’ एक बिज़नेस हब था — यह शहर का एक अहम व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र था। यहाँ गेस्ट कोर्ट, प्रिंटिंग कोर्ट और राजदूतों का दरबार था। सबसे मशहूर और अमीर कुलीन और बोयार (रईस) भी यहाँ रहते थे — जिनमें रोमानोव परिवार भी शामिल था, जो बाद में शाही बना। और व्यापारियों के दान से बने कई चर्च और मठ भी यहाँ थे।
निकोल्स्काया स्ट्रीट पर प्रिंटिंग कोर्ट
आज भी ‘Китай-город’ एक प्रतिष्ठित इलाका माना जाता है, जहाँ कई सरकारी बिल्डिंग और बिजनेस सेंटर स्थित हैं।
वरवर्का स्ट्रीट — रोमानोव बोयारों का चेम्बर