जोसेफ स्टालिन की 5 पसंदीदा किताबें
स्टालिन ने 13 साल की उम्र से ही रोज़ 500 पन्ने तक पढ़ना शुरू कर दिया था। इसी आदत ने उन्हें रूसी भाषा में पकड़ बनाने में मदद की, जो उन्होंने किशोरावस्था में ही सीखी थी, ताकि वह एक धार्मिक सेमिनरी में दाखिला ले सकें।
स्टालिन कविता के बहुत शौक़ीन थे और उन्होंने जॉर्जियाई भाषा में कविताएँ भी लिखी थीं। जीवनीकार रॉय मेदवेदेव के मुताबिक, स्टालिन ने एक ज़माने में लेखक बनने का सपना देखा था। उन्होंने अपने क्रांतिकारी अंडरग्राउंड दिनों में ही किताबें इकट्ठी करना शुरू कर दिया था। विक्टर ह्यूगो उन्हें बहुत पसंद थे और वे एंतोन चेखव, फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की और व्लादिमीर मायाकोव्स्की की बहुत प्रशंसा करते थे।
स्टालिन ने सोवियत संघ की कमान संभालने के बाद सिर्फ किताबें ही नहीं पढ़ीं, बल्कि इतिहास, दर्शन और विज्ञान, यहाँ तक कि जीव विज्ञान पर भी लिखी गई हर चीज़ पर नज़र रखी। हर प्रकाशन उनके खुद के नियंत्रण में होता था।
1. अलेक्जेंडर काज़बेगी – ‘द पैट्रिसाइड’
जॉर्जियाई लेखक अलेक्जेंडर काज़बेगी का उपन्यास 'द पैट्रिसाइड' एक ईमानदार बागी और योद्धा की कहानी है, जो युवा स्टालिन को बहुत पसंद आई। बताया जाता है कि वह इस कहानी के हीरो 'कोबा' जैसा बनना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने कैरेक्टर का नाम, ‘कोबा’, अपनी पहले पार्टी एलियास के तौर पर रखा।
2. अलेक्सेई टॉल्स्टॉय – ‘इवान द टेरिबल’
स्टालिन ने यह नाटक 1942 में पढ़ा था, जब दूसरा विश्व युद्ध अपने चरम पर था, और मोर्चे पर हालात बहुत खराब थे। उन्होंने पन्नों के किनारों पर कई बार ‘टीचर’ शब्द लिखा और पढ़ते समय जो सैन्य रणनीति दिमाग में आईं, उन पर नोट्स भी बनाए। स्टालिन ने ही इवान द टेरिबल पर एक फिल्म बनाने की शुरुआत की थी और सर्गेई आइज़ेन्तीन की स्क्रिप्ट को खुद मंज़ूरी दी थी। इतिहासकारों को इवान द टेरिबल और स्टालिन के किरदार में कई समानताएँ मिलती हैं।
3. मिखाइल शोलोखोव – 'एंड क्वाइट फ्लोज द डॉन'
गृहयुद्ध पर लिखी इस कोसैक कहानी में यह पता लगाना मुश्किल है कि लेखक किसके साथ है – व्हाइट या रेड आर्मी। यह किताब भागों में छपी: पहले दो भागों ने सभी को प्रभावित किया, लेकिन तीसरा भाग रुक गया, क्योंकि सेंसर को लगा कि इसमें व्हाइट आर्मी की बहुत ज़्यादा तारीफ की गई है।
शोलोखोव ने खुद स्टालिन से गुहार लगाई और स्टालिन ने किताब छपने की मंजूरी दे दी। स्टालिन ने इस उपन्यास के बारे में कहा, "शोलोखोव में बहुत बड़ी कला-प्रतिभा है। वह बहुत ईमानदार लेखक भी हैं, वह वही लिखते हैं जो वह अच्छी तरह जानते हैं।"
4. अलेक्सांद्र त्वार्दोव्स्की – 'वासिली त्योर्किन'
स्टालिन उन लेखकों की कद्र करते थे जो सच लिखते थे, खासकर वह जो उन्होंने खुद देखा हो। त्वार्दोव्स्की ने युद्ध के दौरान संवाददाता के रूप में काम किया और अपने अनुभवों से एक खुशमिजाज और बहादुर सैनिक की कविता लिखी। कहा जाता है कि इस कविता में स्टालिन का नाम न होने की वजह से त्वार्दोव्स्की को स्टालिन पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया था। लेकिन बैठक में स्टालिन ने इस पर नाराज़गी जताई और उन्हें ऑर्डर ऑफ लेनिन देने का आदेश दिया।
5. मिखाइल बुल्गाकोव – 'द डेज़ ऑफ द टर्बिन्स'
स्टालिन ने इस नॉन-प्रोलेटारियन नाटक को उपयोगी माना, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे टर्बिन्स जैसे हमदर्दी रखने वाले बुद्धिजीवी, आखिर में रेड आर्मी के आगे झुक जाते हैं। स्टालिन ने लिखा, “द डेज़ ऑफ़ द टर्बिन्स बोल्शेविज़्म की अदम्य ताकत का सबूत है,"।
स्टालिन ने बुल्गाकोव की साहित्यिक प्रतिभा को पहचाना और यहाँ तक कि उन्होंने लेखक को प्रेस उत्पीड़न और उनकी कृतियों के प्रकाशन पर प्रतिबंध से बचाया। स्टालिन का बुल्गाकोव को टेलीफोन कॉल व्यापक रूप से जाना जाता है; इसके बाद, बुल्गाकोव को उनकी थिएटर की नौकरी वापस मिली और उनके नाटक फिर से मंच पर लौटे।