कौन हैं अंकल स्त्योपा? सोवियत संघ के सबसे पसंदीदा पुलिसकर्मी के बारे में 5 तथ्य

Yekaterina Chesnokova / Sputnik
Yekaterina Chesnokova / Sputnik
उनका नाम अंकल स्त्योपा है – वे सबसे न्यायप्रिय, ईमानदार और बहादुर पुलिसकर्मी हैं, यानी एक सच्चे हीरो! और आज भी हर रूसी बच्चा उन्हें जानता है!

1. अंकल स्त्योपा – सभी बच्चों के हीरो

'द्याद्या स्त्योपा' (‘अंकल स्त्योपा’) एक कविता है, जो स्तेपान स्तेपानोव नाम के एक बहादुर पुलिसकर्मी के बारे में है। यह कविता युवा पत्रकार और लेखक सेर्गेई मिखाल्कोव ने लिखी, जब वह एक समर कैंप में ट्यूटर के रूप में काम कर रहे थे। उस समय वह सिर्फ 22 साल के थे।

State Literary Museum सेर्गेई मिखाल्कोव (बाएं) सोवियत पायनियर्स से मिलते हुए, 1955
State Literary Museum

पायनियर बच्चों से मिलने के बाद मिखाल्कोव ने ऐसा किरदार रचा जो बच्चों के दिल के करीब हो, उनके लिए आदर्श हो और असली वीरता दिखाए। यह कविता सोवियत बच्चों के साहित्य में क्लासिक बन गई और मिखाल्कोव की पहली मशहूर रचना बनी।

2. अंकल स्त्योपा – एक पीढ़ी का बचपन

State Literary Museum येवगेनी मिगुनोव का इलस्ट्रेशन (सिनेमा म्यूज़ियम कलेक्शन से)
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मिखाल्कोव ने एक पुलिसकर्मी की ज़िंदगी को चार कविताओं में पिरोया है – 'अंकल स्त्योपा', 'अंकल स्त्योपा – पुलिसकर्मी', 'अंकल स्त्योपा और येगोर' और 'अंकल स्त्योपा – द वेटरन'। पहली कविता 1935 में छपी और आखिरी 1981 में।

सोवियत संघ के बच्चों को यह किरदार बहुत पसंद था और इसी किताब के साथ एक पूरी पीढ़ी बड़ी हुई। अंकल स्त्योपा हर किसी की यादों में बस गए और धीरे-धीरे एक सच्चे राष्ट्रीय हीरो बन गए।

3. जेंटल जायंट

Ivan Aksenchuk / Soyuzmultfilm, 1964 'अंकल स्त्योपा द पुलिसमैन' सोवियत एनिमेटेड फिल्म का एक सीन
Ivan Aksenchuk / Soyuzmultfilm, 1964

अंकल स्त्योपा की सबसे खास पहचान उनका लंबा कद है, जब वे काम से लौटते हैं, तो हर कोई उन्हें दूर से ही देख लेता है। वैसे, सेर्गेई मिखाल्कोव खुद भी लंबे थे, लगभग 190 सेंटीमीटर।

State Literary Museum
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अंकल स्त्योपा के किरदार में लेखक की कई और खूबियाँ भी झलकती हैं: वह भी जीवन में अपना रास्ता खोजते हैं, कई काम करते हैं, द्वितीय विश्व युद्ध में बहादुरी से लड़ते हैं, अपनी असली पेशेवर पहचान पाते हैं और पारिवारिक सुख भी पाते हैं।

4. 'अंकल स्त्योपा' और सोवियत एंथम – दोनों के रचयिता एक ही हैं

State Literary Museum सेर्गेई मिखाल्कोव काम करते हुए
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सेर्गेई मिखाल्कोव को 'अंकल स्त्योपा' के लिए उनका पहला 'ऑर्डर ऑफ लेनिन' मिला था। इसके बाद उन्हें इस सम्मान से तीन बार और नवाजा गया और कई अन्य उच्च राज्य पुरस्कार भी मिले। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत सी मशहूर कविताएँ और कहानियाँ लिखीं। इसके अलावा, मिखाल्कोव ने नाटक और फिल्मी पटकथाएँ भी लिखीं (उनके दोनों बेटे निकिता मिखाल्कोव और आंद्रेई कोंचालोव्स्की – खुद मशहूर फिल्म निर्देशक बने)।
हालाँकि, सेर्गेई मिखाल्कोव को सबसे ज़्यादा USSR और आधुनिक रूसी संघ के राष्ट्रगानों के बोल लिखने के लिए जाना जाता है।

5. चित्रों को बनाया एक मशहूर आर्टिस्ट ने

Detizdat, 1936 पहले पब्लिकेशन का कवर। अमिनादव कनेव्स्की के इलस्ट्रेशन
Detizdat, 1936

कविता का पहला प्रकाशन 'पायनियर' पत्रिका में बिना चित्रों के हुआ। संपादक बेंजामिन इवांतर को यह इतनी पसंद आई कि उन्होंने बिना चित्रों का इंतज़ार किए अगले अंक में कविता छाप दी।

Detizdat, 1936 अमिनादव कनेव्स्की द्वारा चित्रण
Detizdat, 1936

एक साल बाद, 'देतिज़दात' प्रकाशन ने 'अंकल स्त्योपा' को मशहूर आर्टिस्ट अमिनादव कनेव्स्की के चित्रों के साथ एक अलग किताब के रूप में जारी किया। इसी कलाकार के चित्रों से सोवियत बच्चों ने पुलिसकर्मी को जाना। वैसे, कनेव्स्की ने उसी नाम की बच्चों की पत्रिका के लिए एक और प्रतिष्ठित सोवियत किरदार 'मुर्ज़िल्का' बनाया था।

'Gateway to रूस' इस लेख को तैयार करने में सहयोग के लिए स्टेट लिटरेरी म्यूज़ियम का शुक्रिया अदा करता है।

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