टॉल्स्टॉय ने अपने उपन्यास ‘रिसरेक्शन’ में दोस्तोवस्की के साथ कैसे बहस की?

Gateway to Russia (Photo: Tretyakov gallery, Public domain, Leonid Pasternak, Владимир Вдовин/Sputnik) फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की के उपन्यास "द इडियट" के लिए बनाए गए "प्रिंस मिश्किन" इलस्ट्रेशन का रिप्रोडक्शन। आई. ग्लेज़ुनोव का इलस्ट्रेशन। 1956 । स्टेट लिटरेरी म्यूज़ियम के कलेक्शन से। "नेखलीउदोव द जूरर।" लियोनिद पास्तर्नक का इलस्ट्रेशन।
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लियो टॉल्स्टॉय और फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की कभी एक-दूसरे से मिले नहीं। फिर भी, टॉल्स्टॉय ने दोस्तोयेव्स्की की किताबों को बहुत बारीकी और गहराई से पढ़ा।

लियो टॉल्स्टॉय और फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की कभी मिले नहीं, लेकिन टॉल्स्टॉय ने दोस्तोयेव्स्की की किताबें बहुत गहराई से पढ़ीं। उनकी पर्सनल लाइब्रेरी में 'क्राइम एंड पनिशमेंट' और 'द ब्रदर्स करमाज़ोव' की कई एनोटेशन वाली कॉपी थीं, और वह अपनी डायरी और चिट्ठियों में इन किताबों पर बार-बार बात करते थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने 'क्राइम एंड पनिशमेंट' के शुरुआती अध्यायों को काफी सराहा, लेकिन उसी किताब पर उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि उसकी भाषा में कहीं-कहीं लापरवाही है और मनोवैज्ञानिक पहलू कुछ हद तक बनावटी लगते हैं। दोस्तोयेव्स्की के जाने पर टॉल्स्टॉय को ऐसा लगा जैसे उनका कोई अपना सच्चा करीबी चला गया हो। उन्होंने उन्हें "सबसे नज़दीकी, सबसे प्यारा और सबसे ज़रूरी इंसान" कहा।

विचारों में इतनी दूरी और फिर भी उनमें इतनी नज़दीकी, इसी ने "पुनर्लेखन" की घटना को जन्म दिया। दोस्तोयेव्स्की 'क्राइम एंड पनिशमेंट' में बुराई को इंसान के अंदर तलाशते हैं, जैसे रस्कोल्निकोव का ईश्वर और अंतरात्मा के खिलाफ बग़ावत करना। वहीं टॉल्स्टॉय 'रेज़रेक्शन' में अपराध की जड़ को समाज में देखते हैं। उनका मानना था कि असली बुराई किसी एक इंसान के दिल में नहीं, बल्कि खराब सामाजिक ढाँचे में छुपी है।

दोनों लेखकों के बीच एक और बड़ा मुद्दा था, 'इडियट' उपन्यास की कहानी को नए ढंग से पेश करना। दोस्तोयेव्स्की के 'इडियट' में प्रिंस मिश्किन समाज की नज़रों में गिर चुकी नस्तास्या फ़िलिपोव्ना को बचाने की कोशिश करते हैं, जबकि वे खुद उसके पतन के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं। वहीं 'रेज़रेक्शन' में प्रिंस नेखलूदोव खुद कात्युशा मस्लोवा को भटकाते हैं, फिर खुद पश्चाताप करते हैं और अपने गुनाह का प्रायश्चित करने की कोशिश करते हैं।

टॉल्स्टॉय पर 'द हाउस ऑफ़ द डेड' का गहरा प्रभाव पड़ा। वे इसे बार-बार पढ़ते थे और इसे "अद्भुत और सीख देने वाली" किताब कहते थे। इसी किताब ने उन्हें जेल के जीवन और अपराधों व उनकी सज़ाओं के बीच के अंतर को समझने में मदद की।

साहित्यकारों के अनुसार, 'रेज़रेक्शन' एक क्लासिक लेखक का दूसरे को दिया गया रचनात्मक जवाब है। टॉल्स्टॉय दोस्तोयेव्स्की की इस बात से सहमत हैं कि नैतिक पुनरुत्थान के लिए दुखों से गुजरना ज़रूरी है, लेकिन वे इसके लिए एक अलग रास्ता सुझाते हैं।

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