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‘टीपॉट’ किसे कहते हैं और क्यों?

Gateway to Russia (Photo: M. Anufrikov/Sputnik; Jordan Siemens, Gama5, Cavan Images, Malte Mueller/Getty Images)
अगर कोई व्यक्ति किसी अनजान चीज़ को सीखना शुरू करता है, तो उसे रूस में ‘चायनिक’ (чайник) कहा जाता है — यानी ‘टीपॉट’। यहां हम बताते हैं कि शुरुआती लोगों के लिए रसोई से जुड़ा यह नाम कैसे प्रचलन में आया।

इसके कम से कम तीन अलग-अलग किस्से हैं।
पहला किस्सा 20वीं सदी के मध्य का है, जब पहाड़ों पर चढ़ना काफ़ी लोकप्रिय था। नए पर्वतारोही जब अपनी पहली चोटी पर पहुंचते थे, तो एक तयशुदा फोटो खिंचवाते थे: एक हाथ कमर पर और दूसरा हाथ ऊपर उठा हुआ, जिसमें अल्पेनस्टॉक या बर्फ तोड़ने वाली कुल्हाड़ी होती थी। यह पोज़ देखने में बिल्कुल एक टीपॉट जैसा लगता था। स्की करने वाले लोग भी कुछ ऐसा ही करते थे, बस उनके हाथ में स्की पोल होता था, जो “टोंटी” जैसा दिखता था।

दूसरा किस्सा भी आउटडोर गतिविधियों से जुड़ा है। नए ट्रैकर अपने साथ भारी-भरकम केतली (टीपॉट) ले जाते थे, जिसे देखकर अनुभवी साथी मुस्कुरा देते थे। वे जानते थे कि पानी साधारण कैंपिंग बर्तन में भी उबाला जा सकता है। इसलिए किसी के बैग पर बंधी केतली देखकर तुरंत समझ आ जाता था कि यह समूह में नया सदस्य है।

एक तीसरा, थोड़ा रोमांटिक किस्सा भी है। पुराने समय में अगर कोई लड़की किसी लड़के के रिश्ते को ठुकराना चाहती थी, तो वह सीधे मना नहीं करती थी। इसके बजाय वह उसे कद्दू दे देती थी — या कोई और खाली चीज़, जैसे टोकरी, बर्तन या केतली। यह इशारा होता था कि रिश्ता तय नहीं हुआ।

यह शब्द 1990 के शुरुआती दौर में फिर से चलन में आया, जब रूस में कंप्यूटर इस्तेमाल और प्रोग्रामिंग सीखने वालों के लिए अनुवादित किताबें आने लगीं। अंग्रेज़ी शब्द ‘dummies’ के लिए एक सही रूसी शब्द चाहिए था — और ‘चायनिक’ बिल्कुल फिट बैठा।