GW2RU
GW2RU

“ताकि ज़िंदगी रास्पबेरी न लगे” — इस मुहावरे का क्या मतलब है?

Kira Lisitskaya (Photo: mikkelwilliam, Richard Clark/Getty Images)
बिना किसी परेशानी के, एकदम बेफिक्र ज़िंदगी को अक्सर इस तरह कहा जाता है: “Не жизнь, а малина!”: (“ने झिज़्न, आ मालिना!” — यानी “ये ज़िंदगी नहीं, बल्कि रसभरी है!”)

रूसी भाषा और लोक परंपराओं में मीठी रास्पबेरी (raspberry) हमेशा से सुख, आनंद और आरामदायक जीवन का प्रतीक रही है। इसके उलट, कड़वी वाइबर्नम बेरी को मुश्किलों से जोड़ा जाता है। पुराने ज़माने में जुआरी और अपराधी लोग बड़ी जीत या अपनी गुप्त बैठकों की जगह को भी “रास्पबेरी” कहा करते थे। समय के साथ यह रूपक आम बोलचाल में आ गया और हर उस चीज़ का प्रतीक बन गया जो ज़िंदगी को सुखद बनाती है।

उदाहरण के लिए, लेखक आंतोन चेख़व की कहानी ‘टू पेरिस!’ में नायक एक घटना पर सोचता है। उसे एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद लोगों की सहानुभूति उस पर उमड़ पड़ी। जान-पहचान वाले लोग इलाज के लिए पेरिस जाने को पैसे तक देने लगे। वह कहता है:
“ये ज़िंदगी नहीं, रसभरी है! हर कोई दया से देखता है, जहाँ जाओ वहाँ नाश्ता-पानी, और सब पैसे देते हैं।”

लेकिन इस कहावत का एक दूसरा पहलू भी है। अगर कोई किसी की ज़िंदगी मुश्किल बनाना चाहता है, तो रूसी में कहते हैं:
“чтобы жизнь малиной не казалась”
(“श्तोबी ज़िज़्न मालिनोय ने काज़ालस” — यानी “ताकि ज़िंदगी रसभरी न लगे”).

इसका मतलब यह भी होता है कि ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं होती। कभी-कभी मुश्किलें आती हैं, इसलिए ज़्यादा ढील मत दें — सावधान रहें।