“कपड़े उतरने की हालत” कब होती है?

Kira Lisitskaya (Photo: freepik.com)
Kira Lisitskaya (Photo: freepik.com)
अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह मस्ती में “до положения риз” यानी “कपड़े उतरने की हालत तक” हद से ज़्यादा पी ले, तो अगली सुबह सिर्फ खराब नहीं, बल्कि बहुत ज़्यादा खराब होती है।

यह बात दावतों और शराबखोरी से जुड़ी है। बाइबिल के एक प्रसिद्ध किरदार नूह का ज़िक्र मिलता है, जो इतना नशे में हो गया कि अपने कपड़े उतारकर सो गया। माना जाता है कि इसी कहानी से यह कहावत बनी। पुराने समय में “रिज़ा” शब्द का मतलब कपड़े होता था, इसलिए जो इंसान बेहोशी तक पी ले, उसके लिए कहा जाने लगा कि वह “कपड़े उतरने की हालत तक” पी गया।

यह मुहावरा इतना असरदार था कि साहित्य में भी खूब इस्तेमाल हुआ। कहीं इसका मतलब होता है हद से ज़्यादा नशा, और कहीं बहुत तीव्र भावनाएँ दिखाने के लिए, जैसे ज़ोरदार झगड़ा या गुस्सा। आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब होगा: “इतना पी लेना कि इंसान होश में न रहे।”