क्या लियो टॉलस्टॉय ने आन्ना करेनीना को फ्लोबेर के उपन्यास से कॉपी किया था?
मैडम बोवरी का विवाद
फ्लोबेर का उपन्यास मैडम बोवरी 1856 में पेरिस में छपा और तुरंत ही विवादों में घिर गया। यह कहानी एक धार्मिक लड़की की है, जो शादी के बाद ऊबने लगती है, प्रेमी के ठंडेपन से परेशान होकर उसे वापस पाने की कोशिश करती है, और अंत में आत्महत्या कर लेती है। किताब को "अनैतिक" कहकर अदालत में घसीटा गया, लेकिन कुछ महीनों बाद लेखक को बरी कर दिया गया।
टॉलस्टॉय उसी साल पेरिस पहुँचे, जब मुकदमा खत्म हुआ था। वे वहाँ इवान तुर्गनेव के साथ समय बिताते थे। तुर्गनेव ने मैडम बोवरी पढ़ी थी और उसे "दुनिया की सबसे बेहतरीन किताब" कहा था। माना जाता है कि उन्होंने टॉलस्टॉय को इसके बारे में विस्तार से बताया होगा। भले ही टॉलस्टॉय ने उपन्यास उस समय न पढ़ा हो, लेकिन वे इसके कथानक से परिचित थे। फिर भी उन्होंने हमेशा यह छुपाने की कोशिश की।
अन्ना का प्रोटोटाइप और उपन्यास पर काम
आन्ना करेनीना के शुरुआती मसौदों से लगता है कि टॉलस्टॉय शुरू से ही कहानी का ढांचा समझते थे।
1872 में उन्होंने एक असली घटना की जाँच की: एक महिला आन्ना पिरोगोवा अपने प्रेमी से झगड़े के बाद ट्रेन के नीचे कूद गई थी। उस समय इस तरह की आत्महत्या दुर्लभ थी, और टॉलस्टॉय को अपनी कहानी के लिए वास्तविक विवरण चाहिए थे।
टॉलस्टॉय चाहते थे कि आन्ना की कहानी प्राचीन ग्रीक त्रासदी जैसी लगे। इसलिए उन्होंने ग्रीक भाषा सीखी और सोफोक्लेस व यूरिपिडीज़ को मूल में पढ़ा। लेकिन अंतिम संस्करण में उन्होंने "भाग्य के कारण हुई त्रासदी" वाली व्याख्या छोड़ दी और आन्ना की गलती को ही केंद्र में रखा।
रूसी समाज में तलाक और प्रेम प्रसंग
रूसी उच्च वर्ग में बाहरी वैवाहिक संबंध और तलाक आम बात थे।
- सम्राट अलेक्सांदर द्वितीय की प्रेमिका और उनसे हुए बच्चे सबको मालूम थे।
- टॉलस्टॉय की बहन मारिया ने पति से अलग होकर एक स्वीडिश कुलीन से रिश्ता बनाया और बच्चा भी हुआ।
- टॉलस्टॉय की पत्नी की बहन एलिज़ाबेथ ने भी तलाक लेकर अपने चचेरे भाई से विवाह किया।
यानी समाज में ऐसे मामले आम थे और बहुत ज्यादा निंदा नहीं होती थी। लेकिन टॉलस्टॉय ने अपने उपन्यास में इन्हें कठोर रूप से अस्वीकार किया और आन्ना के प्रति समाज के कठोर व्यवहार को और भी गहरा दिखाया।
कवि निकोलाई नेक्रासोव ने तो टॉलस्टॉय का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उन्होंने साबित कर दिया कि एक औरत को अपने पति के अलावा किसी से प्रेम नहीं करना चाहिए।
क्या टॉलस्टॉय ने मैडम बोवरी पढ़ी थी?
हाँ, पढ़ी थी। लेकिन कब? यह स्पष्ट नहीं है। 1892 में उन्होंने अपनी पत्नी को लिखा कि वे "फ्लोबेर की मैडम बोवरी" पढ़ रहे हैं, जो बहुत अच्छी है और फ्रांस में यूँ ही प्रसिद्ध नहीं हुई।
भले ही आन्ना करेनीना आंशिक रूप से मैडम बोवरी से प्रेरित रही हो, इससे टॉलस्टॉय के काम का महत्व कम नहीं होता। साहित्य हमेशा आपसी संवाद, बहस और प्रेरणा पर टिका होता है। और यही विभिन्न लेखकों और दृष्टिकोणों का टकराव महान साहित्य को जन्म देता है।