‘वॉर एंड पीस’ में लियो टॉल्स्टॉय का 'आइडियल मैन' कौन था?
'वॉर एंड पीस' लिखने और शादी से काफी पहले, 1851 में, लियो टॉल्सटॉय ने अपनी डायरी में आकर्षक पुरुषों पर कुछ बड़े दिलचस्प और गहरे विचार लिखे थे। यह सवाल बाद में उनके सबसे अहम विषयों में शुमार हो गया: एक "सच्चे" अरिस्टोक्रेट होने का मतलब क्या है — वह जो एलिगेंट, स्टाइलिश और बेहतरीन हो?
एक ऐसे आदर्श की चाहत जिसे पाया न जा सके, उसकी तलाश टॉल्सटॉय के पुराने गद्य में भी दिखती है। 'यूथ' में वह बताते हैं कि "कॉमे इल फ़ो" इंसान कौन है। एक सच्चे डैंडी के गुण बताते हुए लिखते हैं — बिना गलती के फ्रेंच बोलना, अच्छे से कटे नाख़ून, और झुककर सलाम करने और डांस का सलीका। इन सबके साथ वह एक और बात कहते हैं — "सोची-समझी लापरवाही और बेफिक्री"।
टॉल्स्टॉय मानते हैं कि उन्होंने खुद भी एक अच्छा लुक पाने के लिए बहुत कोशिशें कीं, लेकिन उन्हें कभी समझ नहीं आया कि कैसे उनके दोस्त अच्छे भी दिखते थे और उनकी कोशिशें भी नज़र नहीं आती थीं।उनके दोस्त नैचुरली अच्छे लगते थे। टॉल्सटॉय खुद, अपने सारे अरिस्टोक्रेट वाले ठाठ-बाट के बावजूद, लोगों के बीच बहुत असहज महसूस करते थे। उन्हें लगता था वो अच्छे नहीं दिख रहे और उनका बर्ताव अजीब-सा हो जाता था। यह उनके अंदर की “मैं खुद को कैसे देखता हूँ” और “मैं कैसा बनना चाहता हूँ” की बीच की जंग का ज़िक्र उन्होंने 'वॉर एंड पीस' में किया।
जैसा कि साहित्यिक इतिहासकार आंद्रेई ज़ोरिन कहते हैं, पियरे बेज़ुखोव और आंद्रेई बोलकोंस्की के बीच नताशा रोस्तोवा के लिए होड़ असल में दो टॉल्सटॉय, जैसा वो थे और जैसा वो बनाना चाहते थे के बीच की जंग है। पियरे वह शख्स है जिसे लेखक ने अपने अंदर देखा — अटपटा, तलाश करता हुआ, गलतियाँ करने वाला और बहुत सोच-विचार करने वाला। और प्रिंस आंद्रेई वह आदर्श है, जिसे टॉल्सटॉय ज़िंदगी भर पाना चाहते थे मगर पा नहीं सके। और लेखक की मंशा के अनुसार, इस जंग में असली टॉल्सटॉय की जीत होती है। उपन्यास के आखिरी वर्जन में प्रिंस आंद्रेई की मौत होती है और पियरे के लिए रास्ता खुल जाता है।