नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मो यान का रूस और रूसी साहित्य पर क्या कहना है?

Alexander Avilov/Moscow Agency मो यान — रूस के राइटर्स यूनियन के हेडक्वार्टर में।
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हमने आधुनिक चीनी साहित्य के जाने-माने लेखक से बात की — उन्हें रूस में घूमना क्यों पसंद है और ये यात्राएँ उनकी रचनाओं से कैसे जुड़ी हैं।

रूस यात्रा पर:

"रूस में मेरी यह चौथी यात्रा है। पहली बार 1995 में आया था। उस वक्त मैं मंचूरिया से होता हुआ सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर आया था। मुझे वहाँ की पहाड़ियाँ, प्रकृति और नज़ारे बहुत अच्छे लगे।

"दूसरी बार 2007 में आया, जब 'मॉस्को बुक फेयर' में हिस्सा लिया था। उस बार मुझे सबसे ज़्यादा हैरान किया मॉस्को मेट्रो की गहराई ने। एस्कलेटर से बाहर निकलते हुए मुझे ऐसा लगा जैसे यह लंबा सफ़र कभी खत्म ही नहीं होगा।"

पिछले साल मैं और मेरे दोस्त इरकुत्स्क गए और बैकाल झील देखकर हैरान रह गए। और, ज़ाहिर है, हम ब्लागोवेशचेंस्क और व्लादिवोस्तोक भी गए। मैं ये जगहें क्यों देखना चाहता था? वजह थी वैलेंतिन रासपुतिन और विक्तर अस्ताफ़येव की कहानियाँ। मैं उन जगहों को देखना चाहता था जहाँ ये कहानियाँ लिखी गई थीं। मैंने रासपुतिन की कहानियों वाली अंगारा नदी को देखा। अब मेरा सपना येनिसेई नदी को देखना है। साइबेरिया की विशाल नदियाँ रूसी प्रकृति की समृद्धि बयान करती हैं।

Photo: Yasnaya Polyana Prize press service व्लादिमीर टॉल्सटॉय, मो यान को यास्नाया पोलियाना पुरस्कार देते हुए।
Photo: Yasnaya Polyana Prize press service

नोबेल प्राइज़ से सम्मानित लेखक मिखाइल शोलोखोव से जुड़ी जगहों ने भी मुझे बहुत गहरा प्रभावित किया। आखिर मैंने उस विशाल दोन (डॉन) नदी को अपनी आँखों से देखा। उन्हीं जगहों पर खड़ा हुआ, जहाँ 'क्वाइट डॉन' फिल्माई गई थी। वह उपन्यास मैंने कई बार पढ़ी है। मेरे लिए यह जगह पवित्र है। शोलोखोव के पोते अलेक्सांद्र ने हमें यहाँ घुमाया। वह अपने दादा की यादें बड़ी संभाल कर रखते हैं। उनकी आवाज़ें भी कितनी मिलती हैं — मैंने पोते के अंदर दादा की छवि को देखा।

रूसी साहित्य पर:

मुझे सबसे पहले प्रेरित करने वाले लेखक थे लियो टॉल्सटॉय। मैं यास्नाया पोलियाना गया। इसके अलावा, मुझे यास्नाया पोलियाना पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। टॉल्सटॉय के उपन्यास 'वॉर एंड पीस' में युद्ध के दृश्यों का जिस तरह से चित्रण किया गया है, उसने मुझे बहुत गहराई से प्रभावित किया। मेरे उपन्यास 'रेड गाओलियांग' में चीनी लोगों के जापानी हमलावरों से प्रतिरोध वाला दृश्य — उसमें आपको टॉल्सटॉय के 'ऑस्टरलिट्ज़ की लड़ाई' की झलक मिल जाएगी।

मेरे दूसरे आदर्श हैं दोस्तोयेव्स्की। द ब्रदर्स करमाज़ोव' मेरी मेज़ पर हमेशा रहती है। बार-बार पढ़ता हूँ। उनकी दूसरी किताबें भी मैं अक्सर पढ़ता हूँ।

Petr Protsenko / Getty Images दोन नदी
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मैं तुर्गेन्येव को भी अक्सर पढ़ता हूँ। सोवियत क्लासिक्स की बात करें तो शोलोखोव का नाम लूँगा।  मेरी किताबों में प्रकृति का चित्रण शोलोखोव से प्रभावित है। 'एंड क्वाइट फ्लोज़ द डॉन' किताब में आपको सिर्फ दृश्य और ध्वनियाँ नहीं मिलतीं, बल्कि गंधें भी महसूस होती हैं — जंगली फूल, घास, यहाँ तक कि गोबर। मैं भी आवाज़ों और गंधों को गहरा महसूस करता हूँ। वैसे, मैं हर यात्रा पर नोट्स लिखता  हूँ और फिर एस्से लिखता हूँ। डॉन नदी वाली इस यात्रा पर भी कुछ लिखूँगा

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