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पूश्किन के उपन्यास पर बनी नई रूसी फिल्म 'ओनेगिन' क्यों देखें? 5 वजहें

Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024
हर रूसी जानता है कि येवगेनी ओनेगिन और तात्याना की कहानी क्या है, लेकिन इस किताब को फिल्म में ढालना बहुत मुश्किल है। इसलिए बहुत कम ही लोगों ने इस पर फिल्म बनाने की हिम्मत की है। यही वजह है कि बहुत सारे रूसी इसे सिनेमा में देखने गए — या तो इसे सराहने के लिए या फिर इसे खूब कोसने के लिए!
  1. 'येवगेनी ओनेगिन' पर कम ही फिल्में बनती है

इस उपन्यास पर अगर फिर से फिल्म बनी है, तो यह अकेली वजह काफी है कि आप इसे देखें। 'आन्ना कारेनिना' पर तो कई बार फिल्म बन चुकी है, लेकिन पूश्किन की 'येवगेनी ओनेगिन' पर फिल्म बनाने की हिम्मत बहुत कम डायरेक्टर कर पाते हैं।

वजह यह है कि यह किताब पूरी पद्य यानी वर्स में लिखी है, और इसे मंच पर या फिल्म में उतारना बहुत मुश्किल है — क्योंकि कोई भी बदलाव मूल किताब का अपमान लगता है। हालाँकि, चाइकोव्स्की की ओपेरा 'येवगेनी ओनेगिन' को ज़्यादा बार स्क्रीन पर उतारा गया है, क्योंकि संगीत के साथ उसकी कविताएँ कहीं बेहतर लगती हैं।

इस उपन्यास की संरचना जटिल है और इसमें कई परतें हैं। इसे "रूसी जीवन का एनसाइक्लोपीडिया" कहा जाता है — यह कोई संयोग नहीं है। स्क्रीन पर तो अक्सर प्रेम कहानी आती है, लेकिन किताब में दर्शन,  प्रकृति का वर्णन, और गाँव व शहर की ज़िंदगी का बारीक चित्रण है। यहाँ हम आपको 'येवगेनी ओनेगिन' पढ़ने के 5 कारण बता रहे हैं।

  1. फिल्म में पूश्किन की कविताएँ हैं                                                                                                
Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

फिल्म रिलीज़ होने से पहले रूसी दर्शकों के मन में एक ही सवाल था, क्या इस फिल्म में पूश्किन की असली कविताएँ होंगी? क्योंकि 1999 की ब्रिटिश फिल्म, जिसमें राल्फ फाइंस और लिव टायलर थे, में कविताएँ लगभग न के बराबर थीं।

आज के दौर में अगर कोई फिल्म दो घंटे तक सिर्फ कविता में बात करे, तो शायद वह चले ही न। इतनी देर तक कविता सुनाकर दर्शकों को बाँधे रखना, भले ही वह पूश्किन हो, मुश्किल है।

इसलिए फिल्म के स्क्रीनराइटर एलेक्सी ग्रेवित्स्की ने डायलॉग्स को गद्य यानी प्रोज़ में लिखा, क्योंकि उन्हें लगा कि 19वीं सदी की भाषा आज के लोगों को समझ नहीं आएगी। उन्होंने कोशिश की कि मूल किताब के शब्द और अंदाज़ बरकरार रहें। नतीजा काफी अच्छा है, लेकिन पूश्किन के असली फैंस के लिए यह थोड़ा अजीब लग सकता है। क्योंकि कवि की लिखी बातें जब गद्य में बदली जाती हैं, तो कभी-कभी बहुत अटपटी लगती हैं।

Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

हालाँकि, फिल्म निर्माताओं ने कविता को शामिल करने का एक शानदार तरीका ढूँढ़ा। उन्होंने एक नैरेटर का किरदार जोड़ा (जो उपन्यास में भी है और और जो असल में खुद पुश्किन का ही रूप है)। उन्होंने इस नैरेटर के माध्यम से पुश्किन की कविता को बरकरार रखा। यह नैरेटर कई सीन में पात्रों के साथ अदृश्य रूप से मौजूद होता है, कभी पिता की तरह चिंता करता है, तो कभी कहानी की पेचीदगियाँ समझाता है। यह रोल व्लादिमीर व्दोविचेनकोव ने निभाया, जिन्होंने कविता को बड़े शानदार तरीके से पढ़ा।

तात्याना का ओनेगिन को लिखा पत्र और ओनेगिन का तात्याना को लिखा पत्र, इन दोनों प्यार भरे पत्रों को भी वर्स में ही रखा गया है।

  1. कहानी को मूल किताब के करीब रखा गया है
Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

फिल्म में किताब की मुख्य कहानी को काफी हद तक वैसा ही रखा गया है, और बारीकियों का भी ध्यान रखा गया है। ओनेगिन की जवानी और सेंट पीटर्सबर्ग की ज़िंदगी को थोड़ा छोटा दिखाया गया है, लेकिन गाँव वाले हिस्से, ओनेगिन की लेंस्की और लारिन परिवार से मुलाकात, को बहुत विस्तार से दिखाया गया है। यहाँ तक कि वह छोटा-सा दृश्य भी है, जहाँ ओनेगिन ओडेसा में नींबू डालकर ऑयस्टर खाता है।

इस तरह, यह फिल्म सोवियत सिनेमा की शानदार परंपरा को आगे बढ़ाती है — बड़ी किताबों पर फिल्में बनाने की। सोवियत सिनेमा में, लेखक के मूल पाठ को हमेशा बहुत सावधानी से रखा जाता था। कभी-कभी तो फिल्में इतनी करीब होती थीं कि परीक्षा की तैयारी कर रहे स्कूली बच्चे, जिनके पास किताबें पढ़ने का समय नहीं होता था, वह इन फिल्मों का सहारा ले लेते थे (जैसे — 'ए फ्यू डेज इन द लाइफ ऑफ आई.आई. ओब्लोमोव', 1980; 'वॉर एंड पीस', 1966; 'हार्ट ऑफ ए डॉग', 1988)।

तो, अगर आपको पूश्किन की कहानी याद नहीं है, तो यह फिल्म देखकर आप उसे दोबारा रीफ़्रेश कर सकते हैं।

  1. रूस की खूबसूरत जगहों पर शूटिंग
Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सरिक आंद्रेयास्यान को लेकर लोगों के अलग-अलग विचार हैं। आलोचकों को उनसे कोई बड़ी उम्मीद नहीं थी — क्योंकि उन्होंने 20 से ज़्यादा हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्में बनाई हैं, जिनमें हास्य की गुणवत्ता हमेशा एक जैसी नहीं होती। इसलिए 'ओनेगिन' को शुरू में ज़्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन जब फिल्म रिलीज़ हुई, तो पहले ही हफ्ते में इसने रूस और दूसरे CIS देशों में बॉक्स ऑफिस पर पहला स्थान हासिल कर लिया। फिल्म ने 30 करोड़ रुपये (लगभग $3.3 मिलियन) से ज़्यादा कमाए और आंद्रेयास्यान की अब तक की सबसे सफल फिल्म बन गई।

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसके शूटिंग लोकेशन हैं। कुछ आलोचकों ने मज़ाक में कहा कि दर्शकों ने फिल्म की हर कमी को इसलिए माफ कर दिया, क्योंकि फिल्म में दिखाई गई खूबसूरती ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

'येवगेनी ओनेगिन' में रूस की विविधता पूरी तरह दिखती है, चारों मौसम, शानदार सेंट पीटर्सबर्ग, पुराना मॉस्को, और गाँव की ज़िंदगी का गहरा चित्रण।

'ओनेगिन' फिल्म में रूस के नज़ारों को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है। फिल्म में प्सकोव क्षेत्र की प्रकृति दिखाई गई है — वही जगहें, जहाँ ओनेगिन अपने चाचा की जागीर पर रहता था, और यहाँ तक कि वे स्थान भी दिखाए गए हैं, जहाँ पूश्किन ने खुद इस उपन्यास पर काम किया था। लारिन परिवार के घर की शूटिंग पूश्किन पहाड़ियों में पेत्रोवस्कोए एस्टेट में की गई, जो कभी कवि के दादा की जागीर थी। पूश्किन खुद इस जगह पर कई बार आए थे।

Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

फिल्म में सेंट पीटर्सबर्ग और ज़ारस्कोए सेलो पैलेस के खूबसूरत नज़ारे दिखते हैं। गैचीना और येलागिन पैलेस में भी कुछ सीन शूट किए गए हैं। बस एक थोड़ी-सी अजीब बात यह है कि किताब के कुलीन लोग — भले ही वे कितने भी अमीर क्यों न हों — असल ज़िंदगी में शाही महलों में नहीं रहते थे, लेकिन फिल्म निर्माताओं ने इसे ऐसा दिखा दिया। फिर भी, फिल्म में उस ज़माने का माहौल बड़ी खूबसूरती से बनाया गया है।

  1. क्यों फिल्म में ओनेगिन और दूसरे किरदार उम्र में बड़े दिखते हैं?

रूस में इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल हुआ — खासकर ओनेगिन के किरदार के लिए एक्टर की चॉइस पर। पूश्किन के उपन्यास में ओनेगिन की उम्र 26 साल है, लेकिन फिल्म में यह रोल 41 साल के एक्टर विक्टर दोब्रोनरावोव ने किया है। और इसी उम्र को लेकर आलोचकों ने सबसे ज्यादा आपत्ति जताई।

Sarik Andreasyan/Andreasyan Brothers Film Company, 2024

लेकिन किताब में पूश्किन ने ओनेगिन को बोर और थके हुए इंसान के रूप में दिखाया है — जो कम उम्र में ही बूढ़ा हो चुका है, जीवन से थक चुका है, जैसे वह बहुत बूढ़ा हो गया हो। इस मामले में, थोड़ा बड़ा एक्टर यहाँ अजीब नहीं लगता। इसके अलावा, दोब्रोनरावोव का चेहरा और अंदाज काफी अरिस्टोक्रेटिक है — वह 19वीं सदी के कुलीन की तरह लगते हैं। और वह पिछले 10 सालों से वख्तंगोव थिएटर में ओनेगिन का किरदार निभा रहे हैं, इसलिए वह इस रोल में पूरी तरह से फिट हैं।

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