कैथरीन द्वितीय ने महिलाओं की शिक्षा पर इतना ज़ोर क्यों दिया?

Gateway to Russia (Photo: Ulyanovsk museum; Russian museum; Public domain)
Gateway to Russia (Photo: Ulyanovsk museum; Russian museum; Public domain)
16 मई, 1764 को महारानी द्वारा स्थापित स्मोल्नी इंस्टीट्यूट न केवल रूस में महिलाओं के लिए पहला शैक्षणिक संस्थान बना, बल्कि समाज के इतिहास में एक मील का पत्थर भी बना।

महारानी कैथरीन द्वितीय लॉक, वोल्तेयर, डिडेरोट और रूसो जैसे विचारकों के सामाजिक विचारों से काफी प्रभावित थीं। उनका सपना था ऐसे नागरिकों वाला देश बनाना, जो पढ़े-लिखे हों और अपनी ज़िम्मेदारियां समझते हों। उनका मानना था कि शिक्षित महिलाएं “राजसत्ता और देश की समृद्धि की मज़बूत नींव” बन सकती हैं। वे चाहती थीं कि महिलाएं आदर्श पत्नी बनें, घर संभालें, समझदार और पढ़े-लिखे बच्चों की परवरिश करें और समाज को बेहतर दिशा दें। लेकिन इसके लिए पहले ऐसी महिलाओं को तैयार करना भी ज़रूरी था।

Private collection गुन्नार बर्नडसन. डिडेरोट और कैथरीन द ग्रेट
Private collection

इसी सोच के साथ 16 मई 1764 को स्मोल्नी इंस्टीट्यूट की शुरुआत हुई। यहां लड़कियों को सिर्फ 6 साल की उम्र में दाखिला दिया जाता था। परिवार को लिखित वादा करना पड़ता था कि वे अपनी बेटी को 18 साल की उम्र से पहले घर नहीं ले जाएंगे। छुट्टियां नहीं होती थीं, लंबी मुलाकातों की इजाज़त भी नहीं थी और लड़कियों की चिट्ठियां तक सख्त निगरानी के बाद ही बाहर जाती थीं।

Russian Museum
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लेकिन पढ़ाई के तरीके अपने समय से काफी आगे थे। शारीरिक सज़ा पूरी तरह मना थी और पढ़ाई को बच्चों की रुचि और क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया जाता था।

Russian Museum दिमित्री लेवित्स्की. स्मोलेंस्क. 1772–1776
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लड़कियां सिर्फ संगीत, नृत्य, साहित्य और गृहकार्य ही नहीं सीखती थीं, बल्कि विश्व इतिहास, कला का इतिहास, भूगोल, गणित और यहां तक कि भौतिकी भी पढ़ती थीं।

इसका नतीजा भी शानदार रहा। इस संस्थान से कई ऐसी महिलाएं निकलीं, जिन्होंने इतिहास में अपनी पहचान बनाई — राजदरबार की महिलाओं से लेकर रूस की पहली महिला राजनयिक दार्या लिवेन तक।

Russian Museum दिमित्री लेवित्स्की. स्मोलेंस्क. 1772–1776
Russian Museum

स्मोल्नी ने पूरे देश में महिला स्कूलों और संस्थानों की शुरुआत की राह खोल दी। 19वीं सदी के आखिर तक रूस में महिलाओं की शिक्षा सिर्फ खास लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज का एक आम हिस्सा बनने लगी।

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