सोवियत संघ की इकलौती टूरिस्ट सबमरीन
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, सोवियत संघ मिलिट्री सबमरीन के डिज़ाइन और निर्माण में दुनिया का जाना-माना लीडर बन गया, लेकिन 1980 के दशक के आखिर में, देश के पतन की पूर्व संध्या पर, उन्होंने पर्यटन के लिए सबमरीन बनाने के बारे में सोचा।
पहली सोवियत एक्सकर्शन सबमरीन, 'नेप्च्यून', 18 सितंबर, 1990 को सेवेरोदविंस्क में लॉन्च की गई और अगले वर्ष की गर्मियों में, इसका परीक्षण श्वेत सागर यानी व्हाइट सी में किया गया।
'नेप्च्यून' 28 मीटर लंबी और 4 मीटर चौड़ी थी। यह 40 मीटर (अधिकतम 60 मीटर) की गहराई तक जा सकती थी और इसकी स्पीड 2 नॉटिकल नॉट (3.7 किमी/घंटा) थी। हालाँकि, जब समुद्र में दो पॉइंट से ज्यादा की लहरें उठती थीं, तो इसे पानी में नहीं उतारा जाता था।
'नेप्च्यून' के चालक दल में तीन लोग थे — कप्तान-पायलट, मैकेनिक और गाइड-स्टीवर्ड। इसमें 40 यात्रियों के बैठने की जगह थी और 22 खिड़कियाँ थीं। अंडरवाटर एक्सकर्शन एक घंटे का होता था।
ठंडे उत्तरी पानी में टेस्ट की गई टूरिस्ट सबमरीन से उम्मीद थी कि वह गर्म कैरेबियन सागर में भी काम करेगी। इस मकसद के लिए, 1992 में, रुबिन डिज़ाइन ब्यूरो और सेवेरोदविंस्क मशीन बिल्डिंग प्लांट (सेवमाश) ने इटैलियन कंपनी कॉर्टिना के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया, जिसके पास कैरेबियन के एक आइलैंड पर एक टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स था।
इस अनोखी जगह पर कई साल काम करने के बाद, ‘नेप्च्यून’ रिपेयर और अपग्रेड के लिए अपने मूल नॉर्थ में लौट आया। हालाँकि, मालिकों ने पाया कि इस प्रोजेक्ट से आय अब खर्चों के मुकाबले कम हो गई थी, इसलिए उन्होंने आखिरकार इसे बंद कर दिया।
सोवियत संघ की पहली और आखिरी टूरिस्ट सबमरीन को सेवेरोदविंस्क में ही कई सालों तक पड़े रहने दिया गया। मगर पिछले कुछ सालों में इसे मॉस्को ले जाकर एक कैफे-म्यूज़ियम बनाने की योजना बनाई जा रही है।