लेनिन के मकबरे (मॉसोलियम) पर बार-बार हमले कैसे और क्यों हुए?

Yuri Abramochkin/Yuri Abramochkin's archive
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उन्होंने उस पर थूका, टॉयलेट पेपर रोल फेंके और उस पर पवित्र जल डाला और चिल्लाने लगे, "उठो और चले जाओ!" लेकिन, और भी गंभीर हमले हुए…

पहला हमला 1934 में मित्रोफ़ान निकितिन नाम के एक मज़दूर ने किया, जो समाजवाद से मोहभंग हो गया था। उसने लेनिन के शव पर दो गोलियाँ चलाईं, लेकिन निशाना चूक गया। जब गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो उसने खुद को गोली मार ली।

बहुत दिनों तक सब शांत रहा, लेकिन 1950 के दशक के अंत में एक के बाद एक हमलों की झड़ी लग गई। बिल्डिंग पर पत्थर, स्याही की बोतलें और मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए, और लोगों ने पैरों और स्लेजहैमर से ताबूत (सरकोफैगस) को तोड़ने की कोशिश की। टूटे शीशे की जगह मज़बूत काँच लगाना पड़ा।

Vladimir Sokolayev/МАММ/МDF
Vladimir Sokolayev/МАММ/МDF

सितंबर 1967 में, मकबरे पर पहला आतंकी हमला हुआ। कौनास (Kaunas) का एक शख्स क्रिसानोव एंट्रेंस पर बम लेकर आया। उसने विस्फोट किया, जिससे कई लोग मारे गए। इसके बाद एक नया बुलेटप्रूफ ताबूत बनाने का काम शुरू हुआ, जो 1973 में लगाया गया।

बिल्कुल सही समय पर, क्योंकि कुछ ही महीनों बाद एक और आतंकी हमला हुआ। निकोलाई सावरासोव नाम के एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने ताबूत के पास खुद को उड़ा लिया। ताबूत को कोई नुकसान नहीं पहुँचा, लेकिन उसके साथ दो विजिटर भी मारे गए और 16 लोग घायल हो गए।

अगले वर्षों में, मकबरे और नेता के शव के खिलाफ छोटी-छोटी वैंडलिज्म (बर्बरता) की गतिविधियाँ होती रहीं: लोगों ने थूका, टॉयलेट पेपर फेंके, और पवित्र जल छिड़कते हुए चिल्लाए – "उठो और निकल जाओ!"

सबसे हालिया घटनाएँ 2023 में हुईं। 6 फरवरी को, मॉस्को के एक नशे में धुत फर्नीचर असेंबलर ने लेनिन के शव को चुराने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया, लेकिन वह अपने इरादे नहीं बता सका। बाद में मनोचिकित्सक को बुलाना पड़ा। और 17 जुलाई को, चिता (Chita) निवासी ने मकबरे की तरफ मोलोतोव कॉकटेल फेंका, लेकिन वह सिर्फ बाड़ से जाकर लगा। उस पर गुंडागर्दी का केस चला।

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