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दूसरे विश्व युद्ध के बाद बर्लिन में ज़िंदगी के पुनर्निर्माण में USSR ने किस तरह सहायता की?

Yakov Ryumkin / Sputnik
सिर्फ दो महीने पहले जो शहर मलबे में तब्दील था, वह जीवंत नगरी बन चुका था। इतना कि दूसरे शहरों से भी लोग वहाँ जाकर बसने लगे।

1945 की बसंत ऋतु में जर्मनी की राजधानी पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी। बिजली-पानी ठप था। हालात इतने बुरे थे कि लोगों को स्प्री नदी का गंदा पानी पीना पड़ता था, जिसमें शव बह रहे थे, जिससे टाइफस फैल गया था।

पूरी तरह तबाह होने से इस शहर को सोवियत संघ ने ही बचाया। 28 अप्रैल को, जब सड़कों पर अभी भी जंग जारी थी, बर्लिन के पहले सैन्य गवर्नर जनरल निकोलाई बेरज़ारिन ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत शहर की सारी सत्ता सेना के हाथों में दे दी गई — यानी अब शहर के लोगों की जिंदगी की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर ले ली।

Evgeny Khaldey / Sputnik

कुछ ही दिनों में सोवियत विशेषज्ञों ने कार्लशोर्स्ट में क्षतिग्रस्त बिजलीघर को ठीक कर दिया और टेम्पेलहोफ़ हवाई अड्डे का रनवे साफ़ कर दिया, जहाँ भोजन और दवाइयाँ लेकर विमान आने लगे। फिर राशन कार्ड जारी किए गए और लोगों के बीच भोजन नियमित रूप से बाँटा जाने लगा।

Oleg Knorring / Sputnik

गैरीसन के आत्मसमर्पण के बाद, शहर के बुनियादी ढाँचे को दोबारा खड़ा करने का काम शुरू हो गया। बर्ज़ारिन ने कमांडेंट के तौर पर दो महीने से भी कम समय बिताया (16 जून, 1945 को एक कार दुर्घटना में उनकी दुखद मौत हो गई)। फिर भी, इस छोटी सी अवधि में सड़क परिवहन और मेट्रो सिस्टम बहाल हो गए, और सकड़ों दुकानें, पुस्तकालय, नाई की दुकानें, सिनेमाघर, फार्मेसियाँ और स्कूल फिर से खुलने लगे।

अब निवासियों को सोवियत सैनिकों से कोई डर नहीं था और वे शहर के पुनर्निर्माण में पूरे जोश से जुट गए। दूसरे इलाकों से भी लोग बर्लिन की ओर उमड़ने लगे और बहुत ही कम समय में शहर की आबादी लाखों के हिसाब से बढ़ गई।

जनरल निकोलाई बेरज़ारिन, बर्लिन के पहले सैन्य गवर्नर।
Valery Faminsky/МАММ/МDF/russiainphoto.ru

1975 में, निकोलाई बेरज़ारिन को मरणोपरांत 'बर्लिन के ऑनरेरी सिटिज़न' की उपाधि दी गई। सोवियत शासन के ढहने के बाद, उन्हें और कई अन्य रेड आर्मी कमांडरों को ऑनरेरी सिटिज़न की सूची से हटा दिया गया। लेकिन 2003 में, आखिरकार न्याय हुआ — जर्मन विद्वानों और कार्यकर्ताओं के प्रयासों की बदौलत, इस जनरल को दोबारा सूची में शामिल कर लिया गया।

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