सोवियत यूनियन का विशाल प्रोजेक्ट, जो एक चर्च की वजह से बदल गया
1930 के दशक में वोल्गा नदी पर उगलिच शहर में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनाने की योजना थी। कई मठ और चर्च तो गिरा दिए गए, और कुछ ऐसे थे जो पानी में डूबने वाले थे।
लेकिन कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। 17वीं सदी का चर्च ऑफ़ द नेटिविटी ऑफ़ जॉन द बैप्टिस्ट न सिर्फ़ बचा रहा, बल्कि उसी की वजह से पूरे प्रोजेक्ट को 400 मीटर दूर शिफ्ट करना पड़ा।
क्या ये सच में हुआ था? आर्काइव्स में इसका कोई ज़िक्र नहीं, लेकिन स्थानीय इतिहासकार इस खूबसूरत कहानी को बताते हैं।
सोवियत लेखक मिखाइल रापोव ने अपनी किताब ‘Каменные сказы’ (कामेन्नीये स्काज़ी) में लिखा, "इस चर्च की कलात्मक कीमत इतनी है कि इसको बचाने के लिए प्रोजेक्ट बदलना पड़ा और प्लांट को वोल्गा के ऊपर की तरफ बनाना पड़ा।"
उगलिच के लोग इस चर्च को खास मानते हैं। इसे 1689 में एक अमीर व्यापारी निकिफ़ोर चेपोलोसोव ने अपने मृत बेटे की याद में बनवाया था।
पेंटर निकोलस रेरिक इसकी खूबसूरती के आगे स्तब्ध रह गए और उन्होंने "उग्लिच. पोर्च ऑफ़ द चर्च ऑफ़ जॉन द बैपटिस्ट" पेंटिंग बनाई।