इनविजिबिलिटी कैप कहाँ से आई?

Gateway to Russia (Photo: Westend61/Getty Images, AI/chatgpt) / Getty Images
Gateway to Russia (Photo: Westend61/Getty Images, AI/chatgpt) / Getty Images
यह आइडिया कि एक जादुई चीज़ इनसान को इनविजिबल बना सकती है, दुनिया भर के कल्चर्स में मशहूर रहा है। इसे यूरोप के कल्चर्स (प्राचीन ग्रीस, नॉर्स मिथोलॉजी), एशिया के कल्चर्स (भारत, चाइना, जापान) और यहाँ तक कि नॉर्थ अमेरिका की ओमाहा और ज़ूनी जनजातियों की कहानियों में भी ढूंढा जा सकता है। इस मामले में रशियन फोल्कलोर भी कोई अपवाद नहीं है।

एक ऐसा हेडगियर जो हीरो को इनविजिबल बना दे - रशियन परी कथाओं का एक जरूरी और काफी कॉमन एलिमेंट है। यह "मार्या मोरेवना", "मेंढक राजकुमारी" के कुछ वर्जन, "इवान राजकुमार और ग्रे वुल्फ", "वसीलिसा द वाइज़" की कहानी और दूसरी कई कहानियों में नजर आता है।

यह इनविजिबिलिटी कैप सिर्फ एक जादुई ऑब्जेक्ट नहीं है जो हीरो का रास्ता आसान कर दे। यह उसे इनविजिबल बना देती है, यानी असल में उसे एक भूत-प्रेत, एक आत्मा, या मरे हुओं की दुनिया के जीव जैसी शक्तियाँ दे देती है। यही वजह है कि फोल्कलोरिस्ट्स, खासकर व्लादिमीर प्रॉप, इस टोपी को 'उस पार' वाली दुनिया की चीज़ बताते हैं, जिसे कॉमन कल्चरल भाषा में हेड्स का राज्य कह सकते हैं। इसलिए जो हीरो इसे पहनता है, वह उस वक्त के लिए जीवित नहीं रहता, बल्कि मरे हुओं की दुनिया में पहुँच जाता है।

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